PTV BHARAT 3 AUGUST 2026 रायपुर : तेन्दूपत्ता संग्रहण की नई पहल से अबुझमाड़ के 22 गांवों को मिला लाभ – छत्तीसगढ़ शासन की नई तेन्दूपत्ता संग्रहण नीति से अबुझमाड़ के दूरस्थ गांवों को राहत और रोजगार का नया अवसर मिला है। वर्ष 2026 में पहली बार असीमांकित क्षेत्रों में नए तेन्दूपत्ता फड़ खोले गए, जिससे ग्रामीणों को अपने गांव के पास ही तेन्दूपत्ता बेचने की सुविधा उपलब्ध हुई।
पहले ग्रामीणों को तेन्दूपत्ता बेचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन अब गांव के नजदीक फड़ खुलने से उनका समय, श्रम और खर्च तीनों की बचत हो रही है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं और ग्रामीणों की आय में वृद्धि हुई है।
राज्य शासन ने वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता की दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा निर्धारित की है। ग्रामीणों की मांग पर वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार अबुझमाड़ क्षेत्र में नए फड़ खोलने की प्रक्रिया तेज की गई। वन विभाग ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ से अनुमति प्राप्त की और संग्रहण कार्य शुरू कराया।
इस पहल के तहत कलमानार, ओकपाड़, कुतुल, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, टेकानार, बांहकेर और रायनार में कुल 10 नए तेन्दूपत्ता फड़ स्थापित किए गए। इनके माध्यम से 22 गांवों के 365 संग्राहकों ने 161.254 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया।
संग्राहकों को तेन्दूपत्ता के बदले 8 लाख 86 हजार 897 रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई। समय पर और पारदर्शी भुगतान मिलने से ग्रामीणों का शासन पर भरोसा भी मजबूत हुआ है।
इस योजना से कलमानार, पिड़का, ब्रेहबेड़ा, कंदाड़ी, किशकाल, ओकपाड़, कुतुल, आलबेड़ा, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, ताड़ोकुर, टेकानार, नयापारा, मकसोली, हिकपुला, बांहकेर, झोरीगांव, रेंगाबेड़ा, कोकोड़ी और रायनार सहित कुल 22 गांवों के ग्रामीण लाभान्वित हुए हैं।
तेन्दूपत्ता संग्रहण की यह पहल केवल वनोपज संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार, बेहतर आय और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनकर उभरी है। अबुझमाड़ के ग्रामीणों के लिए यह योजना आत्मनिर्भरता और विकास की नई उम्मीद साबित हो रही है।

