PTV BHARAT 06 AUGUST 2026 – एमसीबी : आर्थिक तंगी को मात देकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं प्रमिला दीदी – जिले के मनेंद्रगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत केवटी की रहने वाली प्रमिला दीदी आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता, संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। कभी सीमित आय और आर्थिक तंगी के कारण परिवार का खर्च चलाना उनके लिए बड़ी चुनौती था। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें कई बार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय स्वयं को मजबूत बनाने का संकल्प लिया और यही संकल्प उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत बना।
वर्ष 2017 में प्रमिला दीदी जय माता दी महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं, जिसका गठन 24 फरवरी 2017 को बिहान-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत किया गया था। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बैठकों में भाग लिया, बचत की आदत विकसित की तथा समूह के माध्यम से वित्तीय प्रबंधन, आजीविका संवर्धन और स्वरोजगार से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त किए। अपनी लगन और जिम्मेदारी के कारण वे शुरुआत से ही समूह में पुस्तक संचालक के रूप में सक्रिय रहीं तथा बाद में सीआरपी कैडर के रूप में भी कार्य करने लगीं।
समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने सबसे पहले रिवॉल्विंग फंड से 2,000 रुपये का ऋण लेकर कृषि कार्य प्रारंभ किया। इस छोटे से प्रयास ने उनके भीतर आत्मविश्वास पैदा किया। बाद में समूह को सीआईएफ की राशि प्राप्त होने पर उन्होंने 10,000 रुपये का ऋण लेकर गांव में एक छोटी किराना दुकान शुरू की। सीमित पूंजी से शुरू हुआ यह व्यवसाय धीरे-धीरे गांव के लोगों की जरूरतों का भरोसेमंद केंद्र बन गया। अपनी मेहनत, ईमानदारी और ग्राहकों के विश्वास के बल पर उन्होंने दुकान को लगातार आगे बढ़ाया।
आज प्रमिला दीदी की किराना दुकान से प्रतिदिन लगभग 200 रुपये का लाभ प्राप्त होता है और उन्हें लगभग 6,000 रुपये की मासिक आय होती है। इसके अतिरिक्त सीआरपी कैडर के रूप में कार्य करने से उन्हें लगभग 5,000 रुपये प्रतिमाह की अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। इस प्रकार उनकी कुल मासिक आय लगभग 11,000 रुपये तक पहुंच गई है, जिससे वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर रही हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब उन्हें किसी साहूकार या अन्य व्यक्ति से उधार लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
प्रमिला दीदी की सफलता केवल आर्थिक उन्नति तक सीमित नहीं है। उन्होंने यह साबित किया है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग मिले तो वे अपने परिवार और समाज की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव की अनेक महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए आगे आ रही हैं। आज प्रमिला दीदी गांव में एक आत्मविश्वासी, सशक्त और प्रेरणादायक महिला उद्यमी के रूप में पहचानी जाती हैं।
जय माता दी महिला स्व-सहायता समूह को समय-समय पर रिवॉल्विंग फंड, सीआईएफ तथा बैंक लिंकेज जैसी वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जिससे समूह की महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने का अवसर मिला। इन संसाधनों का सही उपयोग करते हुए प्रमिला दीदी ने अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया और आज वे अपने परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन चुकी हैं।
प्रमिला दीदी की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, आत्मविश्वास और समूह की सामूहिक शक्ति के माध्यम से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। बिहान योजना के सहयोग से उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। उनकी कहानी ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, स्वरोजगार और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

