PTV BHARAT 07 AUGUST 2026 – रायपुर : नक्सल साये से निकलकर शिक्षा की ओर बढ़ता सुकमा – छत्तीसगढ़ में पालक कनेक्ट (पालक-शिक्षक संवाद) अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों का भविष्य संवर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पालकों और शिक्षकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर बच्चों के शैक्षणिक स्तर और सर्वांगीण विकास को मजबूत करना है। कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाना जाने वाला सुकमा जिला अब शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल पेश कर रहा है। जिला प्रशासन की विशेष पहल और कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में संचालित पालक कनेक्ट अभियान के जरिए दूरस्थ वनांचल के ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से स्कूलों की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
दुर्गम रास्तों को पार कर घर-घर पहुंच रहे शिक्षक
इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत जिले के समर्पित शिक्षक, प्राचार्य और संकुल समन्वयक हैं। ये शिक्षक केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जंगलों, पहाड़ियों और दुर्गम रास्तों को पार कर बच्चों के घर-आंगन तक पहुंच रहे हैं। वे अभिभावकों से व्यक्तिगत संवाद कर शिक्षा के महत्व को समझा रहे हैं और बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
खेत से लेकर मोबाइल तक शिक्षा से जोड़ने की पहल
शासकीय बालक आवासीय हाई स्कूल (पोटाकेबिन) चिंतागुफा के शिक्षकों ने सुदूर गांव बोदीगुड़ा और टेटरई पहुंचकर परिजनों से संवाद किया। एक छात्र को शिक्षक स्वयं अपने साथ पोटाकेबिन लेकर आए ताकि उसकी पढ़ाई तत्काल शुरू हो सके। कक्षा 7वीं की एक छात्रा के लंबे समय से अनुपस्थित रहने पर शिक्षक उसे खोजते हुए खेत तक पहुंचे और परिजनों से उसकी पढ़ाई जारी रखने का आग्रह किया। जिन क्षेत्रों तक सीधे पहुंचना संभव नहीं था, वहां शिक्षकों ने मोबाइल के माध्यम से अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की।
कई गांवों में मिले सकारात्मक परिणाम
पालक कनेक्ट अभियान के तहत जिलेभर से उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। हाई स्कूल पाकेला के शिक्षकों ने पेदापारा पहुंचकर छात्र कृष्णा नाग, गणेश, सुमन और मोहित के परिजनों को बच्चों की नियमित पढ़ाई के लिए सहमत किया। वहीं आदगुड़ा की शाला त्यागी बालिका ज्योति सोड़ी का निकटतम विद्यालय में पुनः प्रवेश कराया गया। भेज्जी क्षेत्र के माड़वी हिड़मा (कक्षा 8वीं), माड़वी जोगा (कक्षा 7वीं) और माड़वी संदीप (कक्षा 9वीं) की भी स्कूल वापसी सुनिश्चित की गई। रेगडगट्टा, गेडापाड़, इंजरम, मैलासुर और पालाचलमा क्षेत्रों में व्यापक मोबाइल संपर्क अभियान चलाकर अभिभावकों से बच्चों को नियमित स्कूल भेजने का आश्वासन प्राप्त किया गया।
भय की जगह अब बच्चों के हाथों में किताबें
जिला प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वनांचल का कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। संवेदनशील प्रशासन, समर्पित शिक्षकों और जागरूक अभिभावकों के संयुक्त प्रयासों से सुकमा की तस्वीर बदल रही है। जिस क्षेत्र में कभी भय और अनिश्चितता का माहौल था, वहां अब बच्चों के हाथों में किताबें, कॉपियां और उज्ज्वल भविष्य के नए सपने दिखाई दे रहे हैं।

