रायपुर : समन्वित कृषि से किसान राजैया पसपुल ने बदली खेती की तस्वीर

PTV BHARAT 17 AUGUST 2026 – बीजापुर : समन्वित कृषि से किसान राजैया पसपुल ने बदली खेती की तस्वीर – खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन और बागवानी जैसी गतिविधियों को जोड़कर आमदनी बढ़ाने और जोखिम कम करने का प्रभावी तरीका अपनाते हुए बीजापुर जिले के गंगालूर तहसील के ग्राम चेरपाल निवासी किसान राजैया पसपुल ने खेती को अधिक लाभकारी बनाने की मिसाल पेश की है।

लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले राजैया ने फसल उत्पादन के साथ मछली और मुर्गी पालन को भी अपनी कृषि गतिविधियों से जोड़ा है। इससे उनकी आय के स्रोत बढ़े हैं और खेती में आत्मनिर्भरता की राह मजबूत हुई है।

उन्नत किस्मों से धान की खेती

राजैया खरीफ सीजन में लगभग 5 एकड़ में धान की खेती करते हैं। वे 1001, महामाया और 1010 जैसी उन्नत धान किस्मों का उपयोग कर रहे हैं। कृषि विभाग से प्राप्त बीज, खाद और माइक्रोन्यूट्रिएंट सहित अन्य सुविधाओं से उन्हें बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक सहयोग मिला है। सिंचाई के लिए उनके पास सौर पंप उपलब्ध है। इसके अलावा ट्रैक्टर और राइस मिल जैसी सुविधाओं ने खेती से जुड़े कार्यों को आसान बनाया है।

सरसों की खेती से बढ़ी आय की संभावना

रबी वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग के मार्गदर्शन में राजैया ने एक एकड़ में सरसों की फसल का प्रदर्शन किया। इससे उन्हें लगभग 200 किलोग्राम सरसों का उत्पादन प्राप्त हुआ। धान के साथ सरसों जैसी अन्य फसलों को अपनाने से खेती में विविधता आई और अतिरिक्त आय का अवसर मिला।

खेत में फसल के साथ मछली और मुर्गी पालन

राजैया ने खेती को केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने समन्वित कृषि पद्धति अपनाते हुए मछली पालन और मुर्गी पालन को भी खेती से जोड़ा है। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है और परिवार के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार हुए हैं।

शासकीय योजनाओं से खेती को मिली नई मजबूती

राजैया को कृषि विभाग के माध्यम से फेंसिंग, स्प्रिंकलर पाइप, किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा और सौर सुजला योजना जैसी विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ मिला है। इन सुविधाओं से सिंचाई व्यवस्था मजबूत हुई और खेती के काम पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हुए हैं।

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

राजैया बताते हैं कि आधुनिक तकनीक अपनाने, कृषि विभाग से मार्गदर्शन लेने और शासकीय योजनाओं का सही लाभ उठाने से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। फसल उत्पादन के साथ मछली और मुर्गी पालन को जोड़कर उन्होंने अपनी खेती को समन्वित कृषि का रूप दिया है।

राजैया पसपुल की यह सफलता बताती है कि खेती में विविधता, आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं का समन्वय किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनकी पहल बीजापुर जिले के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का उदाहरण बन रही है।

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