PTV BHARAT 19 AUGUST 2026 – बेमेतरा : बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता – कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं – जिले में शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और आदिवासी विकास से जुड़ी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में शिक्षा विभाग एवं आदिवासी विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक ली। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। दोनों विभागों को पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने कहा कि बच्चों के भविष्य को संवारने में शिक्षा एवं आदिवासी विकास विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। दोनों विभाग आपसी समन्वय से कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करें कि शासन की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ प्रत्येक पात्र बच्चे तक पहुंचे।
नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर
कलेक्टर ने जिले की सभी शालाओं में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल नामांकन पर्याप्त नहीं है, प्रत्येक बच्चे का नियमित रूप से स्कूल आना और पढ़ना-लिखना सीखना जरूरी है। इसके लिए शिक्षकों और पालकों के बीच नियमित संवाद एवं संपर्क बनाए रखने को कहा गया।
उन्होंने बच्चों के लर्निंग आउटकम पर विशेष ध्यान देने तथा कमजोर विद्यार्थियों के लिए नियमित रेमेडियल क्लास संचालित करने के निर्देश दिए, ताकि प्रत्येक बच्चे की शैक्षणिक क्षमता में सुधार हो सके।
मध्याह्न भोजन में पोषण पर विशेष फोकस
मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि बच्चों को केवल पेट भर भोजन नहीं, बल्कि पौष्टिक और संतुलित आहार मिलना चाहिए। उन्होंने मेन्यू में दाल, हरी सब्जियां, मौसमी फल और अन्य पोषणयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल करने पर जोर दिया।
भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और निर्धारित मेन्यू का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के साथ स्कूलों में रसोइयों की उपलब्धता और खाद्य सामग्री की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
सितंबर तक शत-प्रतिशत जाति प्रमाण पत्र बनाने के निर्देश
आदिवासी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर दिलाने के लिए सितंबर माह तक सभी पात्र बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाने की समयसीमा निर्धारित की गई।
कलेक्टर ने बीईओ और तहसीलदारों को आपसी समन्वय से स्कूल स्तर पर शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी पात्र बच्चा जाति प्रमाण पत्र के अभाव में छात्रवृत्ति या अन्य योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं होना चाहिए।
बालिका सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान
कलेक्टर ने बालिका शिक्षा, सुरक्षा और स्वच्छता की भी समीक्षा की। सभी स्कूलों में बालिका शौचालयों का निर्माण पूरा कराने और उनकी नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
छात्रावासों एवं आश्रमों में बालिकाओं की सुरक्षा के लिए रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों और महिला वार्डन की उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। परिसर में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित निगरानी के निर्देश भी दिए गए।
निर्माण कार्य समय-सीमा में और गुणवत्तापूर्ण हों
स्कूल भवन, अतिरिक्त कक्ष, छात्रावास और शौचालय सहित स्वीकृत निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने इन्हें निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कार्य पूर्ण होने से पहले तृतीय पक्ष से गुणवत्ता जांच कराने तथा स्कूल एवं छात्रावास परिसरों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरा-भरा बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
पालक-शिक्षक संवाद से मजबूत होगी शिक्षा व्यवस्था
कलेक्टर ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी सुधार के लिए शिक्षक, पालक और समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने नियमित पालक-शिक्षक बैठकें आयोजित कर बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति, पोषण और व्यवहारिक प्रगति पर चर्चा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने शिक्षकों से नवाचार एवं प्रभावी शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने तथा उन्हें लगातार स्कूल से जोड़े रखने की अपेक्षा की।
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बीआरसी और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने सभी अधिकारियों को बैठक में दिए गए निर्देशों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करते हुए 15 दिनों के भीतर प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

