PTV BHARAT 25 AUGUST 2026 – रायगढ़ : संघर्ष से समृद्धि की ओर, बरमकेला के विद्याधर यादव ने भेड़ और गाय पालन से गढ़ी स्वरोजगार की नई इबारत – बरमकेला विकासखंड के ग्राम देवगांव निवासी विद्याधर यादव ने भेड़ और गाय पालन को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की है। उनका पशुपालन मॉडल ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और नियमित मेहनत की मिसाल बन रहा है।
70 भेड़ और एक गाय से संभाला पशुपालन व्यवसाय
विद्याधर यादव के पास वर्तमान में करीब 70 भेड़ें और एक दूध देने वाली गाय है। वे पशुपालन को पारंपरिक तरीके से करने के बजाय व्यवस्थित ढंग से उसका प्रबंधन करते हैं।
भेड़ों को चराते समय हिंसक जानवरों और आवारा कुत्तों से सुरक्षा के लिए उन्होंने दो विदेशी नस्ल के कुत्ते भी पाल रखे हैं।
पशुपालन से दो लोगों को मिला रोजगार
विद्याधर के पशुपालन कार्य से गांव के दो अन्य लोगों को चरवाहे के रूप में रोजगार मिला है। दोनों सुबह और शाम पशुओं को चराने की जिम्मेदारी संभालते हैं।
पशुधन विभाग के कर्मचारी भी नियमित रूप से उनके घर पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण और स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं।
हर साल करीब 2 लाख रुपये की आय
विद्याधर यादव को पशुपालन से प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इसमें से करीब 50 हजार रुपये चारे और चरवाहों के खर्च में जाते हैं। इसके बाद भी उनके पास अच्छी शुद्ध आय बचती है।
हाल ही में पशुधन विभाग के उप संचालक ने उनके घर पहुंचकर पशुधन प्रबंधन का जायजा लिया और उनके प्रयास की सराहना की।
पशुपालन से आत्मनिर्भरता की राह
विद्याधर का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन के जरिए स्वरोजगार के कई अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इसके लिए पशुओं के प्रति लगाव, नियमित देखभाल, सही प्रबंधन और बीमारियों से बचाव की जानकारी जरूरी है।
भेड़ पालन से मांस और अन्य उत्पादों के जरिए आय प्राप्त होती है, जबकि गाय से नियमित दूध उत्पादन परिवार के लिए स्थायी आमदनी का जरिया बनता है।
विद्याधर यादव का परिवार आज पशुपालन के सहारे आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहा है और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आया है।

