PTV BHARAT 28 AUGUST 2026 – उत्तर बस्तर कांकेर : जिनसे कभी संघर्ष था, उन्हीं की कलाई पर बांधी राखी – भानुप्रतापपुर क्षेत्र के ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों ने डीआरजी जवानों को राखी बांधकर रक्षाबंधन मनाया। कभी जंगलों में हथियार लेकर आमने-सामने रहने वाले लोगों का यह मिलन हिंसा से शांति और संघर्ष से मुख्यधारा की ओर बढ़ते बदलाव की भावुक तस्वीर बन गया।
पहली बार मनाया रक्षाबंधन, खुद बनाई राखियां
आत्मसमर्पित माओवादी शांति कवाची ने बताया कि वह पहली बार रक्षाबंधन का त्योहार मना रही हैं। मुख्यमंत्री कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से उन्होंने राखी बनाना सीखा और उन्हीं हाथों से तैयार राखी पुलिस जवानों की कलाई पर बांधना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा।
उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण के बाद उन्हें महसूस हो रहा है कि वह वास्तव में समाज की मुख्यधारा में लौट आई हैं।
हथियार की जगह हुनर से नई जिंदगी
शांति कवाची ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि नक्सल पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया।
पुनर्वास केंद्र में उन्हें सिलाई, काष्ठ शिल्प और राखी निर्माण सहित विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उद्देश्य है कि वे इन हुनरों के जरिए सम्मानजनक आजीविका कमा सकें और अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी सकें।
डीआरजी जवान ने बताया भावुक अनुभव
डीआरजी जवान टेकेश्वर हिचामी ने कहा कि पहले परिस्थितियां ऐसी थीं कि दोनों पक्ष बंदूक लेकर आमने-सामने रहते थे। आज उन्हीं हाथों में राखी का पवित्र धागा है।
उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पित महिलाओं द्वारा बांधी गई राखी अब उनकी कलाई पर है और यह सुख, शांति तथा भाई की लंबी उम्र की कामना का प्रतीक बन गई है।
बंदूक से राखी तक का सफर
यह रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि संघर्ष से शांति, हथियार से हुनर और हिंसा से पुनर्वास की बदलती कहानी का प्रतीक बनकर सामने आया।
आत्मसमर्पण और कौशल विकास के माध्यम से पूर्व माओवादी अब हथियारों की जगह अपने हाथों में हुनर लेकर नई जिंदगी शुरू कर रहे हैं। कल तक जो आमने-सामने थे, आज उनकी कलाई पर विश्वास का धागा है।

