अम्बिकापुर : विशेष लेख : पोषण से सशक्त महिलाएं, स्वस्थ बच्चे और विकसित समाज की मजबूत नींव

PTV BHARAT 24 SEPTEMBER –अम्बिकापुर : विशेष लेख : पोषण से सशक्त महिलाएं, स्वस्थ बच्चे और विकसित समाज की मजबूत नींव – किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति का आधार केवल सड़क, भवन और आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि उसके नागरिकों का स्वस्थ और सक्षम होना है। विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे स्वस्थ होंगे, तभी परिवार मजबूत होगा और परिवार मजबूत होने पर समाज के समग्र विकास की नींव मजबूत होगी। इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा हपोषण को केवल भोजन की उपलब्धता तक सीमित नहीं किया जा सकता। गर्भावस्था से लेकर शिशु अवस्था, बाल्यावस्था और किशोरावस्था तक पर्याप्त एवं संतुलित पोषण व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित करता है। इसी सोच के साथ आंगनबाड़ी सेवाओं, पोषण संबंधी गतिविधियों, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, बिहान तथा महतारी वंदन योजना जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों तक स्वास्थ्य, पोषण, जागरूकता और आर्थिक सहयोग पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

मातृत्व के दौरान आर्थिक सहयोग से पोषण को मिला आधार

अम्बिकापुर की अन्नू तिवारी की कहानी बताती है कि मातृत्व के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता परिवार के लिए किस प्रकार उपयोगी साबित हो सकती है। पहली बार गर्भवती होने पर उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी मिली। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें चरणबद्ध रूप से योजना की राशि प्राप्त हुई, जिसका उपयोग उन्होंने अपने खान-पान और पोषण संबंधी जरूरतों में किया।

गर्भावस्था और प्रसव के बाद मां के शरीर को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। पर्याप्त पोषण मां को स्वस्थ रखने के साथ गर्भस्थ शिशु और नवजात के बेहतर विकास में भी सहायक होता है। अन्नू तिवारी का अनुभव इस बात को रेखांकित करता है कि आर्थिक सहयोग उपलब्ध होने से परिवार मातृत्व के महत्वपूर्ण समय में पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने पर अधिक ध्यान दे सकता है।

पोषण केवल स्वास्थ्य नहीं, महिला के आत्मविश्वास की भी ताकत है

एक स्वस्थ महिला केवल अपने स्वास्थ्य की देखभाल नहीं करती, बल्कि वह परिवार की अनेक जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाने में सक्षम होती है। पर्याप्त पोषण से शरीर को आवश्यक ऊर्जा और पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे दैनिक कार्यों को करने की क्षमता, सक्रियता और समग्र स्वास्थ्य को सहारा मिलता है।

स्वास्थ्य बेहतर होने पर महिला का आत्मविश्वास भी मजबूत होता है। वह परिवार के निर्णयों में अधिक सक्रिय भागीदारी कर सकती है, बच्चों की देखभाल और उनकी शिक्षा पर ध्यान दे सकती है तथा अपनी क्षमता के अनुरूप आर्थिक गतिविधियों में भी योगदान दे सकती है। इस प्रकार पोषण का प्रभाव तत्काल स्वास्थ्य से आगे बढ़कर परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से भी जुड़ता है।

लक्ष्मी यादव ने पोषण को बनाया सेवा और आजीविका का माध्यम

ग्राम खैरबार की लक्ष्मी यादव इसका एक अलग लेकिन महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। बिहान योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें पोषण सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। आज वे स्वयं आर्थिक रूप से आगे बढ़ने के साथ गांव की गर्भवती एवं शिशुवती माताओं और बच्चों को पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रही हैं।

घर-घर जाकर संतुलित आहार, स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने वाली लक्ष्मी यादव की भूमिका यह दर्शाती है कि जब महिला को अवसर, प्रशिक्षण और आजीविका का माध्यम मिलता है तो उसका प्रभाव केवल उसके परिवार तक सीमित नहीं रहता। वह समुदाय में भी सकारात्मक बदलाव की वाहक बन सकती है। उन्हें मिलने वाली आय के साथ महतारी वंदन योजना से प्राप्त आर्थिक सहायता परिवार के लिए अतिरिक्त संबल का माध्यम बन रही है।

इस प्रकार महिला सशक्तिकरण और पोषण एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। स्वस्थ और आर्थिक रूप से सक्षम महिला अपने बच्चों के पोषण, शिक्षा और भविष्य में अधिक प्रभावी निवेश कर सकती है।

आंगनबाड़ी केंद्र बने बच्चों के पोषण और विकास के आधार

पोषण की इस व्यापक यात्रा में आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उदयपुर विकासखंड के सलकापारा आंगनबाड़ी केंद्र का उदाहरण बताता है कि जब पोषण सेवाओं के साथ उपयुक्त आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होती हैं तो बच्चों और महिलाओं को बेहतर वातावरण मिल सकता है।

पहले किराए के जर्जर भवन और सीमित स्थान में संचालित यह केंद्र अब नवनिर्मित भवन में संचालित हो रहा है। आईसीडीएस और विकसित भारत जी राम जी योजना के अभिसरण से बने इस भवन में बड़ा हॉल, रसोई, स्टोर, शौचालय, बाथरूम और पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां बच्चों को प्री-स्कूल शिक्षा एवं पोषण संबंधी सेवाओं का लाभ मिल रहा है। साथ ही गर्भवती माताएं और किशोरी बालिकाएं भी स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं से जुड़ी हैं।

यह उदाहरण बताता है कि पोषण कार्यक्रम केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। सुरक्षित भवन, स्वच्छता, पेयजल, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य परामर्श और जागरूकताकृये सभी मिलकर बच्चे के समग्र विकास का वातावरण तैयार करते हैं।

आज का पोषित बच्चा, कल का सक्षम नागरिक

बच्चों के लिए पोषण का महत्व दूरगामी है। बाल्यावस्था में मिलने वाला पर्याप्त पोषण उनके शारीरिक विकास, सीखने की क्षमता और विद्यालयी जीवन को प्रभावित करता है। स्वस्थ बच्चा नियमित रूप से स्कूल जा सकता है, खेल एवं अन्य गतिविधियों में भाग ले सकता है और सीखने के अवसरों का बेहतर उपयोग कर सकता है।

इसके विपरीत, लंबे समय तक पोषण की कमी बच्चे के विकास और सीखने की प्रक्रिया के लिए चुनौती बन सकती है। इसलिए प्रारंभिक वर्षों में पोषण और स्वास्थ्य पर किया गया निवेश वास्तव में आने वाली पीढ़ी में निवेश है।

एक बच्चा जब स्वस्थ वातावरण में बढ़ता है, शिक्षा प्राप्त करता है और अपनी क्षमताओं का विकास करता है, तो आगे चलकर वह परिवार और समाज के लिए अधिक प्रभावी योगदान देने में सक्षम होता है। ऐसे ही बच्चे भविष्य में शिक्षक, चिकित्सक, वैज्ञानिक, किसान, उद्यमी, अधिकारी, श्रमिक और विभिन्न क्षेत्रों के जिम्मेदार नागरिक बनकर समाज की प्रगति में योगदान देते हैं।

पोषण से परिवार, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र का विकास

पोषण का प्रभाव व्यक्ति से परिवार और परिवार से समाज तक पहुंचता है। स्वस्थ मां अपने बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकती है। स्वस्थ बच्चा शिक्षा और विकास के अवसरों का बेहतर उपयोग कर सकता है। शिक्षित और स्वस्थ युवा आगे चलकर रोजगार, उद्यम और सामाजिक गतिविधियों में योगदान देते हैं।

इस प्रकार पोषण पर किया गया निवेश आने वाले वर्षों में मानव संसाधन की गुणवत्ता को मजबूत करता है। स्वस्थ और सक्षम मानव संसाधन उत्पादकता बढ़ाने, गरीबी के दुष्चक्र को कम करने और सामाजिक विकास को गति देने में सहायक होता है। यही प्रक्रिया किसी विकासशील समाज को अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और विकसित समाज की दिशा में आगे बढ़ाने का आधार बनती है।

महिला और बाल पोषण को लेकर दूरदर्शी सोच

छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं को केवल वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की मजबूत पीढ़ी तैयार करने के व्यापक प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी योजना मातृत्व के संवेदनशील समय में आर्थिक सहयोग का आधार देती है। आंगनबाड़ी सेवाएं बच्चों और महिलाओं तक पोषण, स्वास्थ्य तथा प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी सेवाएं पहुंचाने का माध्यम हैं। बिहान जैसी योजना महिलाओं को समूह से जोड़कर आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक भागीदारी के अवसर प्रदान करती है, जबकि महतारी वंदन योजना जैसी आर्थिक सहायता परिवारों को अतिरिक्त संबल देती है।

इन प्रयासों का व्यापक उद्देश्य ऐसी परिस्थितियां तैयार करना है, जहां महिला स्वस्थ, जागरूक और आत्मविश्वासी हो तथा बच्चे को जीवन की शुरुआत से ही पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा का बेहतर वातावरण मिले।

आज एक गर्भवती महिला के पोषण पर दिया गया ध्यान कल एक स्वस्थ बच्चे का आधार बन सकता है। आज एक बच्चे को दिया गया पोषण और प्रारंभिक शिक्षा कल एक सक्षम नागरिक तैयार कर सकती है। और आज तैयार किया गया स्वस्थ एवं सक्षम नागरिक ही भविष्य के आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत पूंजी बन सकता है।ै।

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