PTV BHARAT 11 OCTOBER 2026 – सरगुजा : सेवा संकल्प अभियान-2026 के तहत जल संरक्षण और रोजगार सृजन की मिसाल बना मानिकप्रकाशपुर, 800 स्टैगर्ड ट्रेंच से सहेजा जा रहा वर्षा जल
सेवा संकल्प अभियान-2026 के तहत सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत मानिकप्रकाशपुर में वर्षा जल संरक्षण, मिट्टी के कटाव को रोकने और ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। अम्बिकापुर विकासखंड के मानिकप्रकाशपुर अंतर्गत बिल घुटरा में सामुदायिक स्टैगर्ड ट्रेंच निर्माण के माध्यम से जल एवं मृदा संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण के तहत एक लाख 40 हजार 262 रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति से 800 स्टैगर्ड ट्रेंच का निर्माण कराया गया है। इससे वर्षा जल संरक्षण, भूमि में नमी बनाए रखने और भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इस कार्य के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ ग्रामीण रोजगार सृजन पर भी जोर दिया गया है। निर्माण कार्य के लिए 425.96 मानव दिवस रोजगार का प्रावधान किया गया है, जिससे स्थानीय श्रमिकों को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
800 स्टैगर्ड ट्रेंच से वर्षा जल संरक्षण और मिट्टी के कटाव को रोकने की पहल
ग्राम पंचायत मानिकप्रकाशपुर के बिल घुटरा में सामुदायिक स्टैगर्ड ट्रेंच निर्माण के अंतर्गत 800 गड्ढे बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य बारिश के दौरान बहने वाले पानी की गति को नियंत्रित करना और अधिक से अधिक पानी को जमीन में समाहित होने का अवसर देना है।
स्टैगर्ड ट्रेंच जल एवं मृदा संरक्षण की उपयोगी तकनीक है। इसके तहत भूमि पर निश्चित अंतराल में छोटे-छोटे गड्ढे बनाए जाते हैं, जो बारिश के पानी को रोकने और उसके बहाव को कम करने में सहायक होते हैं। इससे वर्षा जल का अनावश्यक बहाव कम करने, मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण रखने और भूमि में नमी बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। पानी के धीरे-धीरे जमीन में समाहित होने से भू-जल पुनर्भरण को भी बढ़ावा मिल सकता है।
1.40 लाख रुपये की स्वीकृति से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा
सामुदायिक स्टैगर्ड ट्रेंच निर्माण कार्य के लिए एक लाख 40 हजार 262 रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। ग्राम पंचायत मानिकप्रकाशपुर को कार्य की क्रियान्वयन एजेंसी बनाया गया है। इसके माध्यम से गांव के प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने और वर्षा जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के ऐसे कार्य विशेष रूप से उपयोगी हैं, जहां बारिश के दौरान पानी तेजी से बह जाने के कारण भूमि में पर्याप्त नमी नहीं रह पाती। स्टैगर्ड ट्रेंच निर्माण से वर्षा जल को रोकने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिलने की संभावना है।
425.96 मानव दिवस रोजगार का प्रावधान, ग्रामीण श्रमिकों को मिलेगा आर्थिक संबल
सामुदायिक स्टैगर्ड ट्रेंच निर्माण कार्य में जल एवं मृदा संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया गया है। इस कार्य के लिए कुल 425.96 मानव दिवस रोजगार का प्रावधान किया गया है। श्रमिकों के लिए मजदूरी दर 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है।
इस पहल के माध्यम से ग्रामीण श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और परिसंपत्ति निर्माण के दोहरे उद्देश्य को पूरा करने में सहायक हो सकते हैं। इससे श्रमिकों को आजीविका का अवसर मिलने के साथ गांव में जल संरक्षण से जुड़ी उपयोगी संरचनाओं का विकास होता है।
भूमि में नमी और भू-जल पुनर्भरण से ग्रामीण आजीविका को मिलेगा सहयोग
मानिकप्रकाशपुर में निर्मित सामुदायिक स्टैगर्ड ट्रेंच से वर्षा जल संरक्षित करने और भूमि में नमी बनाए रखने में सहायता मिलने की उम्मीद है। वर्षा जल के बहाव को नियंत्रित करने से मिट्टी के कटाव को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे भूमि संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति में सुधार की संभावना है।
जल एवं मृदा संरक्षण से जुड़े ऐसे कार्य लंबे समय में ग्रामीण क्षेत्रों की पर्यावरणीय स्थिति बेहतर बनाने और आजीविका गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।
जल संरक्षण के साथ रोजगार और ग्रामीण विकास की दिशा में पहल
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत मानिकप्रकाशपुर में सामुदायिक स्टैगर्ड ट्रेंच निर्माण ग्रामीण विकास की उस अवधारणा को सामने लाता है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय रोजगार सृजन को भी महत्व दिया जाता है।
एक लाख 40 हजार 262 रुपये की स्वीकृत राशि से 800 स्टैगर्ड ट्रेंच का निर्माण और 425.96 मानव दिवस रोजगार का प्रावधान इस पहल के प्रमुख घटक हैं। यह कार्य दर्शाता है कि गांवों में जल एवं मृदा संरक्षण की छोटी-छोटी संरचनाएं भी वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन, भूमि संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को सहयोग देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

