महासमुंद : समय पर उपचार और पुनर्वास से ऑटो चालक की लौटी आत्मनिर्भरता, कुष्ठ रोग से होने वाली विकृति का हुआ उपचार

PTV BHARAT 14 OCTOBER 2026 – महासमुंद : समय पर उपचार और पुनर्वास से ऑटो चालक की लौटी आत्मनिर्भरता, कुष्ठ रोग से होने वाली विकृति का हुआ उपचार

कभी दूसरों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने वाले बागबाहरा निवासी एक ऑटो चालक की जिंदगी बीमारी के कारण मुश्किलों में घिर गई थी। शरीर पर हल्के रंग के दाग और संवेदना में कमी को नजरअंदाज करना उनके लिए परेशानी का कारण बना। धीरे-धीरे बीमारी का असर बढ़ा और हाथों की उंगलियों में विकृति आने लगी। इससे खाना खाने, कपड़े पहनने और रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई होने लगी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से समय पर उपचार, रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी और पुनर्वास की मदद से उनकी कार्यक्षमता में सुधार आया है। आज वे फिर से स्वयं मोटरसाइकिल चलाने में सक्षम हैं।

महासमुंद जिले में अब तक 578 कुष्ठ रोगियों की पहचान की गई है, जिनका उपचार जारी है। रोग से संबंधित विकृतियों के सुधार के लिए 15 मरीजों की रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की जा चुकी है, जबकि ग्रेड-2 विकृति के 19 मामले दर्ज किए गए हैं।

उपचार और सर्जरी से मिली नई उम्मीद

ऑटो चालक को शुरुआत में जानकारी नहीं थी कि शरीर पर दिखाई देने वाले हल्के रंग के दाग कुष्ठ रोग के लक्षण हो सकते हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण उनकी स्थिति बिगड़ती गई और आजीविका चलाना भी चुनौती बन गया।

स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से उपचार शुरू होने पर उन्हें निर्धारित बहु औषधि उपचार (एमडीटी) का पूरा कोर्स कराया गया। इसके साथ ही जिला चिकित्सालय में रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी (आरसीएस) की गई। नियमित चिकित्सकीय देखरेख और फॉलोअप से उनकी कार्यक्षमता में सुधार हुआ। आज वे फिर से स्वयं मोटरसाइकिल चलाने में सक्षम हैं। दैनिक जीवन के कार्यों में आत्मनिर्भरता की ओर उनकी वापसी ने उनके जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार किया है।

लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कराएं जांच

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर. के. सिंह कुशवाहा ने बताया कि शरीर पर हल्के रंग के दाग के साथ संवेदना में कमी, हाथ-पैरों में सुन्नपन या मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए। समय पर उपचार से विकलांगता और स्थायी विकृति के जोखिम को कम किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग का उपचार बहु औषधि उपचार (एमडीटी) से संभव है। आवश्यकता पड़ने पर रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी और पुनर्वास के माध्यम से मरीजों की कार्यक्षमता में सुधार किया जा सकता है।

कुष्ठ रोग प्रभावित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव न करें

डॉ. सिंह कुशवाहा ने कहा कि कुष्ठ रोग छूने, साथ बैठने, बातचीत करने या सामान्य सामाजिक मेलजोल से नहीं फैलता। इसलिए रोग से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें सम्मान, सहयोग और समान अवसर प्रदान करना जरूरी है।

समय पर पहचान, नियमित उपचार और उचित पुनर्वास से कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों की कार्यक्षमता में सुधार लाया जा सकता है और उन्हें आत्मनिर्भर जीवन जीने में सहायता मिल सकती है।

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