दुर्ग : सेवा संकल्प की कहानी : स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं सोनिया साहू, बैंक सखी के रूप में कमा रहीं 3 हजार रुपये प्रतिमाह

PTV BHARAT 17 OCTOBER 2026 – दुर्ग : सेवा संकल्प की कहानी : स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं सोनिया साहू, बैंक सखी के रूप में कमा रहीं 3 हजार रुपये प्रतिमाह

स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। शासन की विभिन्न योजनाओं और प्रशिक्षण का लाभ उठाकर महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने में भी अहम योगदान दे रही हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी ग्राम बोडेगांव निवासी सोनिया साहू की है, जो बैंक सखी के रूप में ग्रामीणों को बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।

बैंक सखी के रूप में दे रही हैं सेवाएं

स्व-सहायता समूह से जुड़ने और उचित प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सोनिया साहू वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र ननकट्टी में बैंक सखी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिमाह लगभग 3 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है, जिससे उन्हें आर्थिक संबल मिल रहा है और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है।

बैंक सखी के रूप में कार्य शुरू करने में स्व-सहायता समूह से मिले आर्थिक सहयोग ने उनकी महत्वपूर्ण मदद की। वर्तमान में वह डिजिटल भुगतान, बैंकिंग लेन-देन, बीमा सहित विभिन्न वित्तीय सेवाओं के माध्यम से ग्रामीणों को सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक सखियां नागरिकों को उनके गांव में ही बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनमें नए बैंक खाते खोलने, आधार सीडिंग, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), पेंशन भुगतान और छात्रवृत्ति की राशि के वितरण जैसी सेवाएं शामिल हैं।

आत्मविश्वास में हुई बढ़ोतरी

बैंक सखी के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के कार्य ने सोनिया साहू के आत्मविश्वास को बढ़ाया है और उन्हें महिला सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। उनका कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने और प्रशिक्षण मिलने से उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

सोनिया साहू इस पहल से बेहद खुश हैं। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी कहानी दर्शाती है कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग और स्वरोजगार के अवसर देकर उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाया जा सकता है।

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