PTV BHARAT 25 OCTOBER 2026 – कवर्धा : सिरोही नस्ल के बकरे ने बदली बृजलाल की तकदीर, बकरी पालन से आय बढ़कर 70 हजार रुपए तक पहुंची
मेहनत, सही मार्गदर्शन और शासन की योजना का साथ मिले तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक समृद्धि की नई राह खुल सकती है। कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड के वनांचल ग्राम बेंदा निवासी बृजलाल मेरावी की सफलता इसका उदाहरण है। पशुधन विकास विभाग की नर बकरा वितरण योजना के तहत मिले उन्नत सिरोही नस्ल के नर बकरे ने उनके पारंपरिक बकरी पालन को नई दिशा दी है। नस्ल सुधार और बेहतर देखभाल से उनकी बकरियों की संख्या 15 से बढ़कर लगभग 30 हो गई है। वहीं, बकरी पालन से होने वाली वार्षिक आय 20 से 30 हजार रुपए से बढ़कर 60 से 70 हजार रुपए तक पहुंच गई है।
योजना से मिला उन्नत नस्ल का नर बकरा
बृजलाल मेरावी का परिवार खेती-किसानी के साथ बकरी पालन पर निर्भर था। पहले उनके पास स्थानीय देशी नस्ल की 15 बकरियां थीं। मेमनों की धीमी वृद्धि और कम वजन के कारण बिक्री से सीमित आमदनी होती थी।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में पशुधन विकास विभाग की नर बकरा वितरण योजना के तहत उनका चयन किया गया। पशु चिकित्सालय चिल्फी के माध्यम से उन्हें अनुदान पर उन्नत सिरोही नस्ल का नर बकरा उपलब्ध कराया गया।
नस्ल सुधार से बढ़ा पशुधन, आय में भी इजाफा
सिरोही नस्ल के नर बकरे से प्रजनन के बाद संकर नस्ल के मेमने प्राप्त हुए। बेहतर शारीरिक विकास और वजन से बकरी पालन की लाभप्रदता में सुधार हुआ।
पशु चिकित्सालय चिल्फी के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बृजलाल को टीकाकरण, कृमिनाशक दवाओं, संतुलित आहार, खनिज लवण और वैज्ञानिक रख-रखाव के संबंध में मार्गदर्शन दिया। इसका असर उनके पशुधन और आमदनी में दिखाई दे रहा है। बकरियों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है और वार्षिक आय बढ़कर 60 से 70 हजार रुपए तक पहुंच गई है। इससे परिवार को आर्थिक मजबूती मिली है और बकरी पालन आय का महत्वपूर्ण अतिरिक्त साधन बन गया है।
दूसरे पशुपालकों के लिए बने प्रेरणा
बृजलाल मेरावी ने योजना से लाभ मिलने पर शासन और पशु चिकित्सालय चिल्फी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्नत नस्ल सुधार, नियमित टीकाकरण और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियां अपनाकर ग्रामीण परिवार अपनी आजीविका को मजबूत बना सकते हैं। वनांचल क्षेत्र में बकरी पालन को लाभकारी बनाने की दिशा में यह पहल अन्य पशुपालकों के लिए भी प्रेरणादायक है।

