रायपुर : आधुनिक तकनीक और नवाचार से अधोसंरचना विकास को मिलेगी नई दिशा : मंत्री ओ.पी. चौधरी

PTV BHARAT 27 OCTOBER 2026 – रायपुर : आधुनिक तकनीक और नवाचार से अधोसंरचना विकास को मिलेगी नई दिशा : मंत्री ओ.पी. चौधरी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को आधुनिक तकनीक, नवाचार और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से आर्थिक रूप से सुदृढ़, आत्मनिर्भर और बहुआयामी अधोसंरचना विकास संस्था के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से नवा रायपुर अटल नगर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में मंडल द्वारा राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में प्रदेशभर से आए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक निर्माण तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), वित्तीय प्रबंधन, संपदा प्रबंधन, टाउन प्लानिंग स्कीम तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान किया।

मंडल को आवास निर्माण से आगे बढ़कर अधोसंरचना विकास में स्थापित करनी होगी पहचान : मंत्री ओ.पी. चौधरी

कार्यशाला को संबोधित करते हुए आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि बदलते समय और विकास की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप मंडल को अपनी कार्यप्रणाली, तकनीकी दक्षता और कार्यक्षेत्र का विस्तार करना होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार मंडल को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर संस्था के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। आधुनिक तकनीक, नवाचार, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति अपनाकर मंडल प्रदेश में अधोसंरचना विकास को नई दिशा दे सकता है।

उन्होंने कहा कि मंडल के पास अनुभवी अभियंताओं, तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों का बड़ा मानव संसाधन उपलब्ध है। इस विशेषज्ञता और अनुभव का उपयोग केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मंडल को सड़क, पुल-पुलिया, खेल परिसर, स्टेडियम, सार्वजनिक भवन, टाउन प्लानिंग तथा शहरी पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं में भी विशेषज्ञ संस्था के रूप में अपनी पहचान स्थापित करनी चाहिए।

मंत्री चौधरी ने कहा कि मंडल को अपनी तकनीकी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाते हुए अन्य राज्यों की निविदाओं में भी भागीदारी के अवसर तलाशने चाहिए। इसके लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को आधुनिक निर्माण तकनीक, बेहतर परियोजना प्रबंधन, वित्तीय अनुशासन और गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में निरंतर दक्षता बढ़ानी होगी।

उन्होंने बताया कि मंडल की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार के सहयोग से मंडल की लगभग 700 करोड़ रुपये की ऋण देनदारी समाप्त की गई है। इसके साथ ही वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस-2) योजना और प्रभावी विपणन प्रयासों से लंबे समय से रिक्त पड़ी आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों के विक्रय को गति मिली है।

मंत्री चौधरी ने कहा कि भविष्य की आवासीय परियोजनाओं में वास्तविक मांग का आकलन, निर्माण गुणवत्ता, वित्तीय व्यवहार्यता और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पीपीपी, टाउन प्लानिंग स्कीम और पुनर्विकास जैसे नवाचारी मॉडल अपनाकर मंडल अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में अपनी भूमिका का विस्तार कर सकता है।

अधिनियम संशोधन से मंडल के कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों में होगा विस्तार : अध्यक्ष अनुराग सिंह देव

मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का विस्तार कर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के रूप में विकसित करना संस्था के लिए महत्वपूर्ण परिवर्तन है। 24 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित अधिनियम संशोधन के माध्यम से मंडल के नाम और कार्यक्षेत्र का विस्तार किया गया है। यह बदलाव केवल नाम या अधिनियम तक सीमित नहीं है, बल्कि मंडल की कार्यशैली, सोच, जिम्मेदारियों और भविष्य की संभावनाओं में व्यापक परिवर्तन का अवसर है।

उन्होंने कहा कि मंडल को आवास निर्माण के साथ नगर विकास और विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं में भी अपनी भूमिका बढ़ानी होगी। इसके लिए प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को नई तकनीक, नवाचार, बेहतर प्रबंधन तथा परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाना होगा।

सिंह देव ने बताया कि पिछले लगभग 18 महीनों में संपत्ति विक्रय, राजस्व अर्जन और नई परियोजनाओं के क्षेत्र में मंडल ने उल्लेखनीय प्रगति की है। ओटीएस योजना और प्रभावी विपणन प्रयासों से लंबे समय से अविक्रित संपत्तियों के विक्रय में तेजी आई है। मंडल द्वारा बकायादारों को राहत देने के उद्देश्य से विलंबित अवधि की ब्याज राशि में 50 प्रतिशत तथा जलकर पर भारित सरचार्ज राशि में भी 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।

उन्होंने अधिकारियों को बकाया राशि की वसूली के लिए मैदानी स्तर पर प्रभावी प्रयास करने और शून्य बकाया राशि का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंडल की आर्थिक सुदृढ़ता के लिए संपत्तियों का प्रभावी प्रबंधन, राजस्व अर्जन और बकाया वसूली आवश्यक है।

पीपीपी, टाउन प्लानिंग और पुनर्विकास मॉडल से विकास को मिलेगी गति

मंडल अध्यक्ष सिंह देव ने कहा कि अधोसंरचना निर्माण की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस), पुनर्विकास और अन्य नवाचारी वित्तीय मॉडल अपनाने की आवश्यकता है। इन व्यवस्थाओं से नई परियोजनाओं को गति देने के साथ मंडल की वित्तीय क्षमता भी बढ़ाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि मंडल का उद्देश्य प्रदेश के सभी 33 जिलों में नागरिकों को बेहतर सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक आवासीय परिसर उपलब्ध कराना है। नई आवासीय योजनाओं में भवन निर्माण के साथ उद्यान, बाजार, सामुदायिक सुविधाएं, पर्यावरण संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन जैसी आधुनिक सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

प्रशिक्षण से बढ़ेगी तकनीकी दक्षता और कार्यक्षमता : आयुक्त अवनीश कुमार शरण

मंडल आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने कहा कि आधुनिक तकनीक और अधोसंरचना विकास की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अधिकारियों एवं कर्मचारियों का निरंतर क्षमता विकास जरूरी है। ऐसी प्रशिक्षण कार्यशालाएं अधिकारियों को नवीन तकनीकों, प्रबंधन पद्धतियों और कार्यप्रणालियों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान का उपयोग कार्यक्षेत्र में किया जाना चाहिए, ताकि परियोजनाओं में निर्माण गुणवत्ता, समयबद्धता, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित आधुनिक तकनीकों का उचित उपयोग प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने में सहायक होगा।

शरण ने अधिकारियों-कर्मचारियों से जिम्मेदारी, नवाचार और टीमवर्क की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को मंडल की कार्यक्षमता बढ़ाने तथा नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्रिय योगदान देना चाहिए।

आईआईएम, आईआईआईटी और एनआईटी के विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित तकनीकी एवं प्रबंधन संस्थानों के विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर अधिकारियों-कर्मचारियों का मार्गदर्शन किया।

आईआईएम रायपुर के निदेशक डॉ. संजीव पाराशर ने सुशासन और प्रभावी प्रशासनिक प्रबंधन पर विचार साझा किए। उन्होंने महाभारत के विभिन्न पात्रों का उल्लेख करते हुए राजधर्म और व्यक्ति के कर्तव्यों की महत्ता पर प्रकाश डाला। साथ ही प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व क्षमता और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया।

आईआईआईटी नवा रायपुर के प्रोफेसर डॉ. श्रीनिवास के.जी. ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उसके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। वहीं, एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर डॉ. जी.डी. रामटेकर ने स्ट्रक्चरल डिजाइन, आरसीसी संरचनाओं की मजबूती और आधुनिक निर्माण तकनीकों से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया।

आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद तथा मंडल आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने मंडल की वर्तमान गतिविधियों, कार्यक्षेत्र के विस्तार और भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए।

इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों और मंडल के विशेषज्ञों ने नेतृत्व क्षमता, सुशासन, वित्तीय जोखिम प्रबंधन, संपदा प्रबंधन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आरसीसी संरचनाओं की मजबूती और आधुनिक परियोजना विपणन सहित विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया।

कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन और अधोसंरचना विकास के नए अवसरों से परिचित कराते हुए उनकी तकनीकी दक्षता, निर्णय क्षमता और कार्यकुशलता को मजबूत करना था।

इस अवसर पर आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव, आयुक्त अवनीश कुमार शरण, अपर आयुक्त हर्ष कुमार जोशी, अजीत सिंह पटेल, एम.डी. पनारिया, एस.के. भगत, सीईओ बी.बी. सिंह, सीएओ पूजा शुक्ला मिश्रा, स्टाफ ऑफिसर अरुण कुमार वंजारी सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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