रायपुर : राज्योत्सव में भारतीय हथकरघा की समृद्ध परंपरा और विविधता का आकर्षण

PTV BHARAT 2 NOVEMBER 2026 – रायपुर : राज्योत्सव में भारतीय हथकरघा की समृद्ध परंपरा और विविधता का आकर्षण

नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव मैदान में भारतीय हथकरघा की समृद्ध परंपरा और कारीगरों का हुनर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। देश के विभिन्न राज्यों से आए बुनकर अपने हाथों से तैयार खूबसूरत वस्त्रों का प्रदर्शन और विक्रय कर रहे हैं। वस्त्रों के रंग संयोजन, गुणवत्ता और बुनाई की विविधता लोगों को आकर्षित कर रही है। असम, मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के कारीगरों को यहां अपने उत्पादों और कौशल के प्रदर्शन का अवसर मिला है।

विभिन्न राज्यों की पारंपरिक साड़ियों और वस्त्रों का संग्रह

राज्योत्सव के वस्त्र स्टॉल में माहेश्वरी, चंदेरी, मूगा कॉटन, काथा वर्क, मूगा सिल्क, मसलिन प्योर कॉटन, मधुबनी प्रिंट, बनारसी, पोचमपल्ली, कोसा, प्रिंट सिल्क, बटिक सिल्क और भागलपुरी सहित कई प्रकार की साड़ियां उपलब्ध हैं। इनके अलावा साड़ी, दुपट्टे और स्कार्फ जैसे फैब्रिक्स भी किफायती कीमतों पर बिक्री के लिए रखे गए हैं।

कारीगरों को मिल रहा अच्छा प्रतिसाद

मध्यप्रदेश के खंडवा से आए तेज बहादुर सिंह ने बताया कि वे प्रतिवर्ष राज्योत्सव में शामिल होते हैं और छत्तीसगढ़ आकर उन्हें अच्छा लगता है। उनके स्टॉल में माहेश्वरी, चंदेरी और मधुबनी प्रिंट की साड़ियां उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि उनके उत्पादों को यहां अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। शासन की ओर से हथकरघा कारीगरों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वे मार्बल प्रिंट का प्रशिक्षण लेने पांडिचेरी और मधुबनी प्रिंट सीखने नेपाल भी गए थे। उनके संग्रह में डोली और शहनाई की आकृतियों से सजी मधुबनी एवं मिथिला आर्ट की साड़ियों के साथ खूबसूरत दुपट्टे भी शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल के वर्धमान से आए हसीबुल ने बताया कि उनके उत्पादों की अच्छी बिक्री हो रही है। उनके स्टॉल में काथा वर्क, मूगा सिल्क, मूगा कॉटन और लिनन कॉटन की साड़ियां उपलब्ध हैं।

बिहार से आए मिथलेश कुमार के स्टॉल में मधुबनी प्रिंट, केला रेशम, कॉटन सिल्क, वर्ली प्रिंट और बैम्बू सिल्क की साड़ियों की विभिन्न वैरायटी मौजूद हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल से आए शादिर अंसारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में उन्हें अच्छा अनुभव मिल रहा है। उनके स्टॉल में काथा वर्क, जामदानी, पेंच वर्क, असम सिल्क और डांडिया जैसी साड़ियां उपलब्ध हैं।

हथकरघा परंपरा के संरक्षण और कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर

बुनकरों के लिए हथकरघा आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। कुटीर उद्योग के रूप में इस पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करने के साथ कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्योत्सव जैसे आयोजन उन्हें अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर देने के साथ भारतीय हथकरघा परंपरा के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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