PTV BHARAT 5 NOVEMBER 2026- रायपुर : सौर ऊर्जा से जगमगाया नारागांव, सोलर दीदियों के प्रयासों से बना प्रदेश का पहला ऊर्जीकृत गांव
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले का नारागांव स्वच्छ ऊर्जा, महिला सशक्तीकरण और सामुदायिक सहभागिता की दिशा में नई पहचान बना रहा है। जिले की सोलर दीदियों के प्रयासों और सामूहिक पहल से नारागांव प्रदेश का पहला सोलर दीदियों के माध्यम से ऊर्जीकृत गांव बन गया है। गांव के 150 से अधिक घरों में 2 किलोवॉट क्षमता के सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे कुल 300 किलोवॉट विद्युत उत्पादन हो रहा है। यह उपलब्धि स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के साथ ग्रामीण महिलाओं की नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता का भी उदाहरण है।
घर-घर पहुंचाया सौर ऊर्जा का संदेश
नारागांव में सौर ऊर्जा के विस्तार में सोलर दीदियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन महिलाओं ने ग्रामीण परिवारों से संपर्क कर उन्हें सौर ऊर्जा के लाभों की जानकारी दी और घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगवाने के लिए प्रेरित किया। उनकी सक्रिय भागीदारी, सामूहिक प्रयास और बेहतर स्व-प्रबंधन से यह पहल सफल हुई है। इससे ग्रामीण महिलाओं को विकास प्रक्रिया में नेतृत्व का अवसर मिला और गांव में स्वच्छ ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
शून्य हितग्राही अंशदान और शून्य अतिरिक्त शासकीय सहयोग का मॉडल
इस पहल की प्रमुख विशेषता इसका शून्य हितग्राही अंशदान और शून्य अतिरिक्त शासकीय सहयोग का मॉडल है। इसके तहत सोलर रूफटॉप सिस्टम की स्थापना के लिए हितग्राहियों को अपनी ओर से कोई अतिरिक्त राशि खर्च नहीं करनी पड़ी। सोलर दीदियों के प्रयासों, सामूहिक सहभागिता और स्व-प्रबंधन से इस मॉडल को सफल बनाया गया।
पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
सौर ऊर्जा के उपयोग से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है। नारागांव में घर-घर सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित होने से ग्रामीणों को स्वच्छ ऊर्जा का लाभ मिल रहा है। सामुदायिक सहयोग और स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से विकसित यह मॉडल दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।
महिला सशक्तीकरण के साथ आय का नया माध्यम
गुरूर ब्लॉक के आंचल महिला संकुल संगठन की दीदियों के प्रयासों से नारागांव ने यह उपलब्धि हासिल की है। यह पहल बताती है कि महिलाओं को नेतृत्व का अवसर और समुदाय को सामूहिक प्रयास का मंच मिलने पर बड़े बदलाव संभव हैं। सोलर दीदियों ने साबित किया है कि ग्रामीण महिलाएं केवल योजनाओं की हितग्राही नहीं, बल्कि विकास और परिवर्तन की महत्वपूर्ण नेतृत्वकर्ता भी बन सकती हैं।
यह पहल महिलाओं के लिए व्यवसाय और आर्थिक संबल का माध्यम भी बनी है। इसके जरिए सोलर दीदियां अब तक 2.50 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर चुकी हैं।
नारागांव का यह मॉडल स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और सामुदायिक आत्मनिर्भरता के समन्वय का उदाहरण है। सोलर दीदियों के माध्यम से प्रदेश के पहले ऊर्जीकृत गांव के रूप में उभरा नारागांव छत्तीसगढ़ में हरित ऊर्जा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

