PTV BHARAT 23 JUNE 2026 – महासमुंद : पीएम-जनमन योजना से कमार जनजाति के जीवन में बदलाव, बहुउद्देशीय केंद्र बन रहे विकास का आधार
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से महासमुंद जिले की विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। जिला प्रशासन और आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के संयुक्त प्रयासों से वर्षों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित कमार परिवार अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
धनसूली में बना सुविधाओं का केंद्र
योजना के तहत कमार बहुल ग्राम धनसूली में वर्ष 2024 में बहुउद्देशीय केंद्र की स्वीकृति मिली थी। गांव में कमार जनजाति की 86 आबादी और 20 परिवार निवास करते हैं। जुलाई 2025 से यह केंद्र संचालित हो रहा है और अब स्थानीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण सुविधा केंद्र बन चुका है।
केंद्र में आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य परीक्षण केंद्र और सामुदायिक भवन की सुविधाएं उपलब्ध हैं। आंगनबाड़ी में बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा दी जा रही है, जबकि स्वास्थ्य केंद्र में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और दवा वितरण की व्यवस्था की गई है।
सर्वे से सामने आई थीं मूलभूत समस्याएं
योजना की शुरुआत में जिला प्रशासन द्वारा कमार बस्तियों का विस्तृत सर्वेक्षण कराया गया। सर्वे में पता चला कि बड़ी संख्या में परिवार आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बैंक खाते और जाति प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेजों से वंचित थे।
इसके अलावा कई बस्तियों में सड़क, बिजली, पेयजल, आवास और आंगनबाड़ी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था।
मॉडल केंद्र के रूप में हो रहा विकास
सर्वे के आधार पर तैयार कार्ययोजना के तहत शासन ने दो बहुउद्देशीय केंद्रों की स्वीकृति दी, जो वर्तमान में संचालित हैं। इन केंद्रों को मॉडल केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए खेल परिसर, ओपन जिम और किचन गार्डन जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
इसके साथ ही पिथौरा विकासखंड के भिथीडीह में नए आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन भी शुरू कर दिया गया है।
मुख्यधारा से जुड़ रही कमार जनजाति
पीएम-जनमन योजना के माध्यम से कमार जनजाति को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बहुउद्देशीय केंद्र न केवल सुविधाओं की पहुंच बढ़ा रहे हैं, बल्कि समुदाय के समग्र विकास और सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम भी बन रहे हैं।
यह पहल विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों को विकास की मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

