रायपुर : दिव्यांग बेटी को मिला सुरक्षित आश्रय, प्रशासन की संवेदनशील पहल से पुनर्वास केन्द्र में हुआ प्रवेश

PTV BHARAT 23 JUNE 2026 – जशपुर : दिव्यांग बेटी को मिला सुरक्षित आश्रय, प्रशासन की संवेदनशील पहल से पुनर्वास केन्द्र में हुआ प्रवेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दिव्यांगजनों के कल्याण और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत जशपुर जिले की 24 वर्षीय दिव्यांग बालती बाई को सुरक्षित आश्रय और बेहतर देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

जशपुर विकासखंड के ग्राम कोमडो की निवासी बालती बाई 70 प्रतिशत सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित हैं। उनकी माता का पूर्व में निधन हो चुका है और बहन के विवाह के बाद वे अपने वृद्ध पिता सुखराम उरांव के साथ रह रही थीं। मजदूरी के लिए पिता के बाहर जाने पर उन्हें लंबे समय तक घर में अकेले रहना पड़ता था, जिससे सुरक्षा और दैनिक आवश्यकताओं को लेकर गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं।

कलेक्टर के निर्देश पर हुई त्वरित कार्रवाई

बालती बाई के पुनर्वास और सुरक्षित देखभाल के लिए उनके पिता ने कलेक्टर रोहित व्यास को आवेदन सौंपा। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। समाज कल्याण विभाग ने विभिन्न पुनर्वास संस्थानों से संपर्क स्थापित किया और उपयुक्त व्यवस्था तलाशने का प्रयास शुरू किया।

अम्बिकापुर स्थित केंद्र में स्थान उपलब्ध नहीं होने पर विभाग ने मनेन्द्रगढ़ जिले से समन्वय स्थापित किया। इसके बाद रॉबर्ट कनान संस्था द्वारा संचालित घरौंदा पुनर्वास केन्द्र में प्रवेश की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

18 जून को मिला नया आश्रय

18 जून 2026 को बालती बाई का घरौंदा पुनर्वास केन्द्र, मनेन्द्रगढ़ में प्रवेश कराया गया। यहां उन्हें निःशुल्क आवास, भोजन, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सुरक्षित वातावरण और नियमित देखभाल मिलने से उनके जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार हुआ है।

पिता ने जताया आभार

अपनी पुत्री को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलने पर सुखराम उरांव ने जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपनी बेटी की सुरक्षा और देखभाल को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहती।

यह पहल दिव्यांगजनों के पुनर्वास, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में प्रशासन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का प्रेरणादायी उदाहरण है।

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