रायपुर : वर्तमान चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार नए आपराधिक कानूनों ने न्याय व्यवस्था में लाया ऐतिहासिक परिवर्तन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

PTV BHARAT 2 AUGUST 2026 रायपुर : नए आपराधिक कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली से न्याय व्यवस्था में आया ऐतिहासिक बदलाव : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वर्तमान समय की चुनौतियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाए गए नए आपराधिक कानून भारत की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन लेकर आए हैं। इनका उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रणालियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्याय प्रक्रिया का हिस्सा बनाकर व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया गया है।

राजधानी रायपुर में आयोजित “स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस” राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं, जिन्होंने डेढ़ सौ वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों का स्थान लिया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को कानूनी मान्यता मिलने से अपराध अनुसंधान और अभियोजन प्रणाली मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा शुरू होने से अपराध जांच को नई दिशा मिलेगी। ई-साक्ष्य, ई-समन और न्याय श्रुति जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से न्यायिक प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी हुई है। उन्होंने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) के जरिए राज्य के सभी पुलिस थाने ऑनलाइन जुड़े हुए हैं और अब तक 1 लाख 97 हजार 547 ऑनलाइन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के माध्यम से पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, जेल और अन्य संस्थाओं के बीच डिजिटल समन्वय स्थापित हुआ है, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज हुआ है और न्याय प्रक्रिया में देरी कम हुई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए नौ नए साइबर थाने शुरू किए हैं और व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। साथ ही नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण तथा क्षमता विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

कार्यशाला में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा कि नए आपराधिक कानून न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनाएंगे। उन्होंने बताया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल अभिलेखों को व्यापक कानूनी मान्यता दी है, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने अपराध पंजीयन, अनुसंधान, तलाशी, जब्ती और वीडियो रिकॉर्डिंग जैसी प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि जून माह में जिला न्यायालयों में 9,910 और उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों की मूल भावना यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध न्याय मिले। उन्होंने “वन डेटा, वन एंट्री” की अवधारणा, ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, CCTNS, नेफिस, CRPI एप्लिकेशन और डीएनए सैंपलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों के व्यापक उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

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