PTV BHARAT 20 AUGUST 2026 – रायपुर : विशेष लेख : शिशु संरक्षण माह – स्वस्थ बचपन और सुरक्षित भविष्य का आधार – शिशु जीवन का शुरुआती चरण उनके स्वास्थ्य, पोषण और भविष्य के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य एवं महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ‘शिशु संरक्षण माह’ का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू किया गया है। अभियान के तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस विशेष अभियान का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के साथ बाल मृत्यु दर को कम करना तथा माताओं और परिवारों को बेहतर पोषण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है।
बच्चों को मिलेंगी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं
शिशु संरक्षण माह के दौरान स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ‘ए’ की खुराक दी जा रही है, जिससे विटामिन-ए की कमी से होने वाली समस्याओं और संक्रमण से बचाव में मदद मिल सके।
6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए एनीमिया की रोकथाम हेतु आयरन एवं फॉलिक एसिड सिरप उपलब्ध कराया जा रहा है। जिन बच्चों के नियमित टीके छूट गए हैं, उन्हें आवश्यक टीकाकरण से जोड़ने का भी प्रयास किया जा रहा है।
कुपोषित बच्चों की पहचान और उपचार
अभियान के तहत आंगनबाड़ी स्तर पर बच्चों का वजन और लंबाई मापकर उनके पोषण स्तर का आकलन किया जा रहा है। गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चों की पहचान कर आवश्यकतानुसार उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्रों से जोड़ा जाएगा।
बच्चों में दस्त और डिहाइड्रेशन की स्थिति से बचाव के लिए माताओं को ओआरएस और जिंक के उपयोग की जानकारी भी दी जा रही है।
माताओं को पोषण और देखभाल के लिए जागरूक किया जा रहा
शिशु संरक्षण माह में केवल दवाएं या स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना ही उद्देश्य नहीं है। माताओं और परिवारों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
माताओं को जन्म के एक घंटे के भीतर बच्चे को मां का पहला गाढ़ा पीला दूध यानी कोलोस्ट्रम देने तथा शुरुआती छह माह तक केवल स्तनपान कराने के महत्व की जानकारी दी जा रही है।
छह माह की आयु पूरी होने के बाद स्तनपान के साथ उम्र के अनुरूप पौष्टिक पूरक आहार शुरू करने की सलाह दी जा रही है। बच्चों को जबरदस्ती खिलाने के बजाय धीरे-धीरे नए स्वाद और खाद्य पदार्थों से परिचित कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर भी ध्यान
माता-पिता को बच्चों से बात करने, उन्हें पढ़कर सुनाने और उनके लिए गाने जैसी गतिविधियों के माध्यम से मस्तिष्क विकास को प्रोत्साहित करने की सलाह दी जा रही है।
बच्चों को पर्याप्त नींद, उम्र के अनुरूप शारीरिक गतिविधि और खेलने के अवसर देने पर भी जोर दिया जा रहा है। साथ ही बच्चों को लंबे समय तक स्ट्रोलर, बाउंसर, झूले या अन्य प्रतिबंधित रखने वाले उपकरणों में न रखने की सलाह दी जा रही है, ताकि उन्हें स्वतंत्र रूप से चलने-फिरने और आसपास की दुनिया को समझने का अवसर मिले।
स्वच्छता से संक्रमण से बचाव
अभियान के दौरान हाथ धोने की सही आदत, साफ-सफाई और स्वच्छता के महत्व के बारे में भी परिवारों को जागरूक किया जा रहा है। साफ वातावरण और सुरक्षित स्वच्छता व्यवहार बच्चों को कई संक्रमणों से बचाने में मदद कर सकते हैं।
स्वस्थ बचपन के लिए सामूहिक जिम्मेदारी
शिशु संरक्षण माह केवल सरकारी स्वास्थ्य अभियान नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए परिवार और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का अवसर है। स्वास्थ्यकर्मियों, मितानिनों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और अभिभावकों के समन्वित प्रयास से बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य में सुधार लाने तथा कुपोषण की समस्या को कम करने की दिशा में प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
अभियान का व्यापक उद्देश्य एक ऐसी स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त पीढ़ी तैयार करना है, जिसकी नींव जीवन के शुरुआती वर्षों में मजबूत हो।

