PTV BHARAT 21 AUGUST 2026 – रायपुर : बिहान से कम लागत में राखी निर्माण को मिला नया आयाम, आत्मनिर्भर बन रहीं ग्रामीण महिलाएं – छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं स्थानीय संसाधनों और अपने पारंपरिक हुनर को आजीविका के साधन में बदल रही हैं। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत किशुन नगर की जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं रक्षाबंधन के अवसर पर कम लागत में राखियां तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।
12 महिलाएं तैयार कर रहीं आकर्षक राखियां
रक्षाबंधन को देखते हुए समूह की 12 महिलाएं इन दिनों घरेलू और स्थानीय संसाधनों से अलग-अलग डिजाइन की राखियां बना रही हैं। तैयार राखियों को स्थानीय बाजार में स्टॉल लगाकर और घर से भी बेचा जा रहा है।
इससे महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी के साथ अपनी आजीविका को मजबूत करने का अवसर मिल रहा है।
चावल, गेहूं और मक्का के बीजों से तैयार हो रही राखियां
समूह की सदस्य सोनाली सिंह ने बताया कि राखियां तैयार करने के लिए चावल, गेहूं, मक्का और कोहड़े के बीज सहित घर में उपलब्ध सामग्री का उपयोग किया जाता है। इन सामग्रियों को रंगकर और सजाकर आकर्षक डिजाइन बनाए जाते हैं।
आवश्यकतानुसार रेशमी धागे, ऊन और अन्य सजावटी सामग्री बाजार से खरीदी जाती है।
कम लागत में बढ़ी आय की संभावना
दीप्ति चौधरी के अनुसार घरेलू सामग्री के इस्तेमाल से राखियों की उत्पादन लागत कम रहती है। महिलाएं अपने खाली समय में सामूहिक रूप से बैठकर राखियां तैयार करती हैं और त्योहार के दौरान मांग बढ़ने पर उत्पादन भी बढ़ा देती हैं।
बिहान से मिले प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से महिलाओं को कम निवेश में आजीविका गतिविधि संचालित करने का अवसर मिला है। इससे वे परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपनी आय भी अर्जित कर पा रही हैं।
तीन वर्षों से जारी है पहल
समूह की सदस्य आशा रवि ने बताया कि महिलाएं पिछले करीब तीन वर्षों से घरेलू सामग्री से राखियां तैयार कर रही हैं। समूह की सभी सदस्य उत्पादन और बिक्री में मिलकर भाग लेती हैं। इससे एक-दूसरे का सहयोग मिलने के साथ नई गतिविधियां सीखने का अवसर भी मिलता है।
सीजनल कारोबार से पूरे साल आय के अवसर
जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं केवल राखी निर्माण तक सीमित नहीं हैं। वे मौसम और त्योहार के अनुसार वर्षभर अलग-अलग आजीविका गतिविधियों का चयन करती हैं। इससे उन्हें किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग समय पर आय के नए स्रोत मिलते हैं।
स्थानीय संसाधन बने आत्मनिर्भरता का आधार
बिहान से जुड़ने के बाद महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं। घर में उपलब्ध सामग्री और अपने हुनर का उपयोग कर वे कम निवेश में स्वरोजगार के अवसर तैयार कर रही हैं।
राखी निर्माण जैसी गतिविधियां ग्रामीण महिलाओं के लिए कम लागत में आय अर्जित करने का साधन बनने के साथ स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं। समूह की महिलाओं ने उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनने और नई आजीविका गतिविधियां सीखने का अवसर देने के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

