रायपुर : छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक उड़ान, संस्कृति और विरासत को भी नई पहचान

PTV BHARAT 25 AUGUST 2026 – रायपुर : छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक उड़ान, संस्कृति और विरासत को भी नई पहचान – पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवा रायपुर में प्रेस वार्ता के दौरान विभाग की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है।

निजी निवेश और रोजगार पर जोर

पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए पिछले ढाई वर्षों में कई पहल की गई हैं। फिल्म सिटी के लिए 203 करोड़ 53 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर के विकास की अनुमानित लागत करीब 350 करोड़ रुपये बताई गई है।

सरकार होमस्टे और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दे रही है। वर्तमान में 390 से अधिक टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट और 26 होटल पंजीकृत हैं। पर्यटक गाइड, आतिथ्य, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर कम से कम 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए अयोध्या-काशी दर्शन

श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत आईआरसीटीसी के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का संचालन किया गया है, जिनके माध्यम से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या और काशी दर्शन कराया जा चुका है।

चित्रकोट और सिरपुर के विकास की तैयारी

चित्रकोट को केवल जलप्रपात नहीं बल्कि विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। सिरपुर के विस्तृत पर्यटन विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जबकि मैनपाट और जशपुर में भी पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर है।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भोरमदेव कॉरिडोर के विकास हेतु 145 करोड़ 99 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। रतनपुर महामाया मंदिर क्षेत्र समेत अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजे गए हैं।

डिजिटल पर्यटन को मिल रहा विस्तार

पर्यटन विभाग की नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल सूचना और पर्यटन सुविधाओं को एकीकृत किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से करीब 6 करोड़ 48 लाख रुपये तथा पर्यटन इकाइयों से करीब 31 करोड़ 75 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।

सरकार का लक्ष्य 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान स्थापित करना है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत अगले पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में सतत विकास, निजी निवेश, समुदाय आधारित पर्यटन और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।

18 पर्यटन संपत्तियां निजी भागीदारी से विकसित होंगी

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के जरिए निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने की योजना है। इससे लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने और 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

कलाकारों और वरिष्ठ साहित्यकारों के लिए सहायता

संस्कृति विभाग की योजनाओं के तहत कलाकारों के कल्याण पर भी जोर दिया जा रहा है। कलाकार कल्याण कोष के तहत पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को करीब 30 लाख 3 हजार रुपये की चिकित्सा सहायता दी गई है। मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के तहत 87 कलाकारों को करीब 19 लाख 8 हजार रुपये की सहायता दी गई है।

वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों के लिए मासिक सहायता योजना के तहत 407 जरूरतमंद वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों को 82 लाख 12 हजार रुपये की पेंशन दी गई है।

बस्तर पंडुम और लोककलाओं के संरक्षण पर जोर

संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश के 89 विशिष्ट मेला-मड़ई, उत्सव और समारोहों का आयोजन किया जा रहा है। बस्तर की लोकपरंपरा और जनजातीय संस्कृति को व्यापक पहचान देने के लिए पिछले दो वर्षों से ‘बस्तर पंडुम’ आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में मिलने और सम्मानित होने का अवसर मिला।

‘पावस प्रसंग’, ‘रंगतरंग’, ‘रंगपरब’ और ‘लोकरंग पर्व’ जैसे आयोजनों के जरिए पंडवानी, भरथरी, ददरिया, जसगीत, करमा, पंथी, बांसगीत और देवारगीत जैसी पारंपरिक विधाओं को मंच दिया जा रहा है। साथ ही छत्तीसगढ़ की लोककलाओं और जनजातीय परंपराओं का डिजिटल आर्काइव भी तैयार किया जा रहा है।

363 सांस्कृतिक संस्थाओं को 7.85 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

पिछले ढाई वर्षों में 363 निजी सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं को 854 सांस्कृतिक आयोजनों के लिए 7 करोड़ 85 लाख 3 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।

सिरपुर को विश्व धरोहर की दिशा में कदम

सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की दिशा में नॉमिनेशन डोजियर तैयार कर भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया है। सिरपुर में बौद्ध, जैन और हिंदू स्थापत्य परंपराओं का सह-अस्तित्व इसकी विशेष पहचान है।

प्रदेश के 63 राज्य संरक्षित स्मारकों के संरक्षण पर भी कार्य जारी है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 12 स्मारकों के संरक्षण, उन्नयन और पर्यटक सुविधाओं के विकास की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

संग्रहालय और डिजिटल अभिलेखागार का विकास

महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर में नई ‘रियासत गैलरी’ और मौजूदा गैलरियों के उन्नयन का प्रस्ताव है। पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो और संध्याकालीन कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी काम चल रहा है।

छत्तीसगढ़ से संबंधित लगभग 12 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है और उन्हें वेब अभिलेखागार के माध्यम से आम लोगों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।

2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण

रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र के रीवां स्थित मृत्तिकागढ़ में पुरातात्विक उत्खनन के दौरान लगभग 2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण मिले हैं। यहां प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से कलचुरी काल तक के अवशेष और विभिन्न राजवंशों के सोने, चांदी एवं तांबे के सिक्के मिले हैं।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन और संस्कृति का विकास केवल नए पर्यटन स्थलों या आयोजनों तक सीमित नहीं है। लक्ष्य स्थानीय रोजगार, आर्थिक गतिविधियों, कलाकारों के कल्याण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और छत्तीसगढ़ की पहचान को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है।

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