PTV BHARAT 29 AUGUST 2026 – अम्बिकापुर : बिहान से बहनों को मिला आर्थिक संबल, खीरे की खेती से सुभद्रा मंडल ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी – छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सकालो की श्रीमती सुभद्रा मंडल ने कृषि को आय का नया साधन बनाया है। काली माँ स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने समूह के माध्यम से 1 लाख रुपये का ऋण लिया और एक एकड़ भूमि में खीरे की खेती शुरू की।
पूंजी की कमी बनी थी बड़ी बाधा
सुभद्रा मंडल बताती हैं कि पहले सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण वह बड़े स्तर पर खेती नहीं कर पाती थीं। परिवार की आमदनी से रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होने के बाद खेती में निवेश के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं बचती थी।
खेती को आय के स्थायी साधन के रूप में विकसित करने की इच्छा थी, लेकिन पूंजी के अभाव में वह आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।
बिहान के ऋण से शुरू हुई खीरे की खेती
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद सुभद्रा को आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला। समूह के माध्यम से 1 लाख रुपये का ऋण मिलने पर उन्होंने एक एकड़ में खीरे की खेती शुरू की।
उनके अनुसार इस ऋण ने केवल खेती के लिए पूंजी ही उपलब्ध नहीं कराई, बल्कि अपने दम पर आर्थिक गतिविधि शुरू करने का आत्मविश्वास भी दिया।
‘लखपति दीदी’ बनने का लक्ष्य
सुभद्रा का लक्ष्य खीरे की खेती से होने वाली आमदनी के जरिए परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग करना और भविष्य में अपनी आय को दोबारा आजीविका गतिविधियों में निवेश कर उसे और बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ने की है। उनके लिए खेती अब केवल पारंपरिक काम नहीं, बल्कि परिवार की आय बढ़ाने और बेहतर भविष्य बनाने का माध्यम बन चुकी है।
विष्णु भैया के प्रति जताया आभार
सुभद्रा मंडल ने बिहान से जोड़ने और ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समूह के माध्यम से मिले आर्थिक सहयोग ने उन्हें अपनी मेहनत को आय के अवसर में बदलने का रास्ता दिया।
अब वह खीरे की खेती के माध्यम से उत्पादन और आमदनी बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं।
महिलाओं की मेहनत को मिला संस्थागत सहारा
बिहान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। महिलाएं अपनी स्थानीय परिस्थितियों और रुचि के अनुसार खेती, पशुपालन, मछली पालन और सब्जी उत्पादन जैसी गतिविधियां अपना रही हैं।
सुभद्रा मंडल की कहानी इसी प्रयास की एक मिसाल है, जहां स्व-सहायता समूह, संस्थागत ऋण और मेहनत ने मिलकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की है।

