PTV BHARAT 1 SEPTEMBER 2026 – कवर्धा : जनदर्शन में कलेक्टर तूलिका प्रजापति ने सुनी आमजन की समस्याएं, लता साहू बनीं लखपति दीदी – कलेक्टर तूलिका प्रजापति ने कलेक्टर सभागार में आयोजित जनदर्शन में वनांचल क्षेत्र से पहुंचे बैगा आदिवासियों सहित आम नागरिकों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी मांगों और समस्याओं की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवेदनों का प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश
कलेक्टर ने विभागीय अधिकारियों से प्राप्त प्रकरणों पर चर्चा करते हुए उनका परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने और निराकरण की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
बिहान से जुड़कर लता साहू ने बदली अपनी जिंदगी
कबीरधाम जिले के ग्राम सेमो निवासी श्रीमती लता साहू कभी परिवार के भरण-पोषण के लिए पति के साथ दूसरे शहरों में मजदूरी करने को मजबूर थीं। आज वह अपने ही क्षेत्र में स्वरोजगार से जुड़कर लखपति दीदी की पहचान बना चुकी हैं।
लता साहू ‘बिहान’ से जुड़कर जय मां संतोषी स्व-सहायता समूह की सदस्य बनीं और वर्तमान में समूह की सचिव हैं। समूह से जुड़ने के बाद मिले अवसरों के जरिए उन्होंने पति के सहयोग से कैंटीन का काम शुरू किया।
डीपीआरसी कैंटीन से 2 से 2.50 लाख रुपये की सालाना आय
लता वर्तमान में कबीरधाम के डीपीआरसी में कैंटीन संचालित कर रही हैं। इसके साथ विवाह, छठी और अन्य सामाजिक आयोजनों में भोजन बनाने का काम भी करती हैं।
इन गतिविधियों से उन्हें सालाना करीब 2 से 2.50 लाख रुपये की आय हो रही है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बाद अब उन्हें रोजगार के लिए गांव और क्षेत्र छोड़कर पलायन नहीं करना पड़ता।
बेटियों को डॉक्टर बनाने का सपना
लता की तीनों बेटियां पढ़ाई कर रही हैं। वह उन्हें बेहतर शिक्षा देकर डॉक्टर बनाने का सपना देख रही हैं।
उन्होंने बताया कि पहले परिवार चलाने के लिए बाहर मजदूरी करने जाना पड़ता था, लेकिन आज अपने ही क्षेत्र में काम करके परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं और बेटियों के भविष्य के लिए बेहतर योजना बना रही हैं।
“विष्णु भइया के सहयोग से बनी लखपति दीदी”
लता साहू अपनी सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं और मिले अवसरों को देती हैं। उन्होंने कहा कि “विष्णु भइया के योजना और सहयोग से आज मैं लखपति दीदी बनी हूं।”
उन्होंने बताया कि कैंटीन उनके लिए रोजगार का साधन होने के साथ लोगों को कम कीमत में भरपेट भोजन उपलब्ध कराने का माध्यम भी है। उनकी सास ने भी उनकी सफलता पर गर्व जताया।
पलायन की मजबूरी से आत्मनिर्भरता तक
लता साहू की कहानी बताती है कि स्वयं सहायता समूह और स्थानीय आजीविका के अवसरों से ग्रामीण महिलाएं अपने क्षेत्र में ही रोजगार विकसित कर सकती हैं। ‘बिहान’ के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का परिणाम यह है कि वे परिवार की आय बढ़ाने के साथ सम्मानजनक और आत्मनिर्भर पहचान भी बना रही हैं।

