PTV BHARAT 01 OCTOBER 2026 – धमतरी : खेत से बाजार तक आत्मनिर्भरता की नई अलख, गट्टासिल्ली FPC बनी ग्रामीण उद्यमिता की मिसाल – धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPC) की पांच वर्षों की यात्रा ग्रामीण उद्यमिता और महिला नेतृत्व की मिसाल बनकर उभरी है। किसानों और महिला कृषकों ने मिलकर ‘किसान-स्वामित्व वाले व्यवसाय’ का मॉडल विकसित करते हुए सामूहिक निर्णय, बाजार की समझ और अपने उत्पादों का उचित मूल्य हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
550 शेयरधारकों ने लिया सामूहिकता का संकल्प – ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत नगरी में आयोजित FPC की वार्षिक आमसभा में करीब 550 महिला और पुरुष शेयरधारक शामिल हुए। नगरी के पांचों क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) से पहुंचे सदस्यों ने कंपनी की पांच वर्षों की प्रगति, वित्तीय लेखा-जोखा, लाभांश और आगामी योजनाओं पर चर्चा की।
चुनौतियों से विश्वास तक का सफर – शुरुआत में छोटे और सीमांत किसानों, विशेषकर महिलाओं को एक मंच पर लाना और उनमें संस्थागत स्वामित्व की भावना विकसित करना चुनौती थी। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (BoDs) के सदस्यों के अनुसार, निरंतर संवाद और पारदर्शी कार्यशैली से यह संशय धीरे-धीरे विश्वास में बदला। आज महिला किसान योजना की लाभार्थी होने के साथ निर्णय प्रक्रिया और सामूहिक व्यवसाय की सक्रिय संचालक भी हैं।
खेत से बाजार तक सामूहिक पहुंच और ब्रांडिंग – गट्टासिल्ली FPC किसानों को केवल कच्चे माल के उत्पादक के रूप में सीमित रखने के बजाय प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन से जोड़ने पर जोर दे रही है। बिचौलियों पर निर्भरता कम कर किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने के लिए सुगंधित धान और प्रसिद्ध नगरी दुबराज का संगठित विपणन किया जा रहा है। इसके साथ ही लघु वनोपज (NTFP) सहित अन्य कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार अवसर तलाशे जा रहे हैं, ताकि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके।
महिला नेतृत्व ने संभाली कमान – स्वयं सहायता समूहों और CLF से जुड़ी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने FPC को नई दिशा दी है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में ग्रामीण महिलाओं की मौजूदगी उनके व्यावसायिक निर्णयों और उद्यमिता में बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। इससे पारिवारिक आय के साथ महिलाओं के सामाजिक सम्मान में भी वृद्धि हुई है।
कृषि, संस्कृति और सामुदायिक चेतना का संगम – वार्षिक आमसभा में व्यापारिक विषयों के साथ नगरी की कृषि-संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। स्थानीय CLF की महिलाओं और बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से “छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा क्यों कहा जाता है” और ‘पुनर्योजी कृषि पद्धतियों’ के महत्व को प्रस्तुत किया।
डिजिटल विपणन से विस्तार की तैयारी – पांच वर्षों के सफर के बाद गट्टासिल्ली FPC का आगामी फोकस उत्पादों की गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग और व्यापक बाजार नेटवर्क विकसित करने पर है। सामूहिक स्वामित्व और महिला नेतृत्व के माध्यम से FPC किसानों को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

