PTV BHARAT 4 NOVEMBER 2026 – रायपुर : बस्तर और सरगुजा सहित दूरस्थ अंचलों के युवाओं तक पहुंचे विश्वस्तरीय वैज्ञानिक शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नवाचार की शक्ति से समृद्ध बनाना राज्य सरकार का संकल्प है। प्रदेश को औद्योगिक एवं आर्थिक विकास के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन, संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में छत्तीसगढ़ को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और चिकित्सा अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस दौरान भारतीय विज्ञान संस्थान और छत्तीसगढ़ शासन के बीच तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर संभावित सहयोग, वैज्ञानिक अधोसंरचना, संस्थागत व्यवस्थाओं और क्रियान्वयन की प्रारंभिक रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया गया।
वैज्ञानिक संस्थानों की विशेषज्ञता का लाभ युवाओं तक पहुंचाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने भारतीय विज्ञान संस्थान के निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिकों का छत्तीसगढ़ आगमन पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान देश और दुनिया के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों में शामिल है। इसकी विशेषज्ञता और अनुसंधान क्षमताओं का लाभ प्रदेश के विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, स्वास्थ्य सेवाओं और विशेष रूप से युवाओं को मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी उत्कृष्टता और उच्च कौशलयुक्त मानव संसाधन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। राज्य सरकार ऐसी विश्वस्तरीय वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक अधोसंरचनाएं विकसित करना चाहती है, जिनका लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिले।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बस्तर, सरगुजा सहित ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ अंचलों में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत इन युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने की है।
उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ सहयोग की संभावनाओं का गंभीरता से परीक्षण कर प्रस्तावित परियोजनाओं की तकनीकी, वित्तीय और संस्थागत व्यवहार्यता का अध्ययन किया जाए तथा ठोस एवं समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए।
तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर चर्चा
बैठक में तीन प्रमुख परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से विचार किया गया। इनमें प्रदेश में विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना, विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड संस्थान का विकास और चिकित्सा अनुसंधान एवं स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ तक पहुंचाना शामिल है।
विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर का प्रस्ताव
छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी प्रदेश के खनिज, इस्पात, धातु, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े उद्योगों के लिए उपयोगी हो सकती है। इस केंद्र में अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपी, एक्स-रे आधारित विश्लेषण, उच्च तापमान पर पदार्थों का परीक्षण, नैनो टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक एवं चुंबकीय पदार्थों का अध्ययन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वैज्ञानिक विश्लेषण जैसी सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना है।
इन सुविधाओं से धातुओं एवं मिश्रधातुओं के गुणों का अध्ययन, उन्नत पदार्थों का परीक्षण, नई विनिर्माण तकनीकों का विकास और औद्योगिक उत्पादों की गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सकेगा। इससे रक्षा, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी अनुसंधान एवं नवाचार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
प्रस्तावित केंद्र में लगभग 600 शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के आवासीय प्रशिक्षण की क्षमता विकसित करने तथा तीन वर्षों में करीब 1,800 विद्यार्थियों को उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इससे प्रदेश के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग संस्थानों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, स्टार्टअप और औद्योगिक इकाइयों को उच्चस्तरीय परीक्षण एवं अनुसंधान सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही विदेशी संस्थानों पर निर्भरता, अनुसंधान की लागत और समय कम करने तथा उद्योगों की तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा और औद्योगिक क्षमताओं को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीक से जोड़ने से प्रदेश के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी और अनुसंधान आधारित उद्योगों, तकनीकी नवाचार तथा उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए संस्थान
बैठक में भारतीय विज्ञान संस्थान के अकादमिक मार्गदर्शन में चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विशेष संस्थान की स्थापना के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इसका उद्देश्य विज्ञान एवं गणित विषयों में उच्च प्रशिक्षित और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से परिचित शिक्षकों की नई पीढ़ी तैयार करना है।
प्रस्तावित पाठ्यक्रम में भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित के साथ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, वैज्ञानिक अनुसंधान, संचार कौशल, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर ध्यान दिया जाएगा।
संस्थान में 14 आधुनिक शिक्षण प्रयोगशालाएं, 600 विद्यार्थियों की आवासीय क्षमता, समृद्ध पुस्तकालय, डिजिटल शिक्षण सुविधाएं, आधुनिक व्याख्यान कक्ष, खेल सुविधाएं और शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए आवासीय अधोसंरचना विकसित करने की परिकल्पना है। यहां 25 पूर्णकालिक शिक्षकों की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
भारतीय विज्ञान संस्थान द्वारा पाठ्यक्रम निर्माण, प्रयोगशाला विकास, शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने में अकादमिक मार्गदर्शन देने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता की आधारशिला है। विज्ञान एवं गणित में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के लिए उत्कृष्ट शिक्षकों की आवश्यकता है। इस पहल से विशेष रूप से ग्रामीण और जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
चिकित्सा अनुसंधान और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों में सहयोग
तीसरी प्रस्तावित पहल के तहत भारतीय विज्ञान संस्थान के मेडिकल स्कूल की शैक्षणिक, वैज्ञानिक और अनुसंधान क्षमताओं का लाभ छत्तीसगढ़ में उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। इसमें किफायती चिकित्सा जांच तकनीकों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवाओं,

