PTV BHARAT 23 JUNE 2026 – रायपुर : किसानों के चेहरे पर मिठास : भोरमदेव शक्कर कारखाना ने रचा देश में भुगतान का नया रिकॉर्ड – गन्ना किसानों के लिए समय पर भुगतान सबसे बड़ी चिंता होती है, लेकिन कबीरधाम जिले के भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना ने इस मामले में देशभर में एक नई मिसाल कायम की है। लगातार दूसरे वर्ष कारखाने ने जून माह में ही किसानों को समर्थन मूल्य (एफआरपी) और अतिरिक्त रिकवरी राशि का शत-प्रतिशत भुगतान कर सहकारी शक्कर उद्योग में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
रविवार को आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की उपस्थिति में 29 करोड़ 83 लाख रुपये की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में अंतरित की गई। इसमें 6 करोड़ 91 लाख रुपये एफआरपी की शेष राशि तथा 22 करोड़ 92 लाख रुपये अतिरिक्त रिकवरी राशि शामिल है। इसके साथ ही पेराई सत्र 2025-26 में किसानों को कुल 107 करोड़ 10 लाख रुपये का भुगतान पूरा कर लिया गया है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि केवल आर्थिक भुगतान नहीं, बल्कि किसानों और सहकारिता व्यवस्था के बीच मजबूत विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव शक्कर कारखाना हजारों किसानों का अपना संस्थान है और किसानों से अधिक गन्ना उत्पादन एवं आपूर्ति करने का आह्वान किया। उन्होंने आगामी सत्र में चार लाख मीट्रिक टन से अधिक गन्ना पेराई का लक्ष्य हासिल करने की बात भी कही।
भोरमदेव शक्कर कारखाना किसान हितैषी नवाचारों के कारण भी विशेष पहचान बना रहा है। लगातार तीसरे वर्ष 12 प्रतिशत से अधिक शुगर रिकवरी, रियायती दर पर शक्कर वितरण, ‘बलराम सदन’ कृषक प्रतीक्षालय, मिट्टी परीक्षण सुविधा, प्रेसमड वितरण, उन्नत गन्ना बीज एवं सीडलिंग तथा नियमित प्रशिक्षण जैसी पहलें किसानों की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद कर रही हैं।
इसके अलावा कारखाना परिसर में संचालित शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत श्रमिकों को मात्र पांच रुपये में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना के चेयरमैन एवं कलेक्टर गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में अपनाई गई पारदर्शी और किसान-केंद्रित कार्यप्रणाली ने इसे देश के अग्रणी सहकारी शक्कर कारखानों में शामिल कर दिया है। समय पर भुगतान, आधुनिक तकनीक, उत्पादन वृद्धि और किसानों की सक्रिय भागीदारी ने यह साबित किया है कि मजबूत सहकारिता व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान कर सकती है।
आज भोरमदेव मॉडल देश के अन्य सहकारी शक्कर कारखानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है।

