PTV BHARAT 13 JULY 2026 रायपुर : एआई तकनीक से वन और वन्यजीवों की होगी चौबीसों घंटे निगरानी – वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और वन सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू किया गया है। यह पहल वन्यजीवों की सुरक्षा, मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम तथा अवैध शिकार, लकड़ी तस्करी और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
वन बल प्रमुख अरुण पांडेय, पीसीसीएफ (वन्यजीव) ओम प्रकाश यादव तथा क्षेत्र संचालक गुरुनाथन एन.जी. के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस परियोजना के तहत 70 से 80 फीट ऊंचे टावरों पर पी2पी (Peer-to-Peer) मॉड्यूल और एआई कैमरे लगाए जा रहे हैं। इनके माध्यम से दूरस्थ और दुर्गम वन क्षेत्रों में वन्यजीवों और संदिग्ध गतिविधियों की 24 घंटे निगरानी की जाएगी।
परियोजना का प्रारंभिक ट्रायल ओडिशा सीमा से लगे कुल्हाडीघाट, इंदागांव, रिसगांव, दक्षिण उदंती और पायलीखण्ड उत्तर उदंती रेंज में किया जा रहा है। ये क्षेत्र हाथियों और अन्य वन्यजीवों के प्रमुख आवागमन गलियारे होने के साथ-साथ अवैध वन्यजीव व्यापार, सागौन तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी और अतिक्रमण की दृष्टि से भी संवेदनशील माने जाते हैं।
एआई आधारित कैमरे एशियाई हाथी, बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे प्रमुख वन्यजीवों की स्वतः पहचान करेंगे। साथ ही शिकारी, लकड़ी तस्कर, अवैध घुसपैठिए और अतिक्रमणकारियों जैसी संदिग्ध गतिविधियों का भी स्वतः पता लगाएंगे। यह पूरी प्रणाली पोर्टेबल होगी, जिससे आवश्यकता अनुसार इसे अन्य स्थानों पर भी स्थापित किया जा सकेगा।
सिस्टम किसी वन्यजीव या संदिग्ध व्यक्ति की पहचान होते ही फ्रंटलाइन वन कर्मियों और अधिकारियों को व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत अलर्ट भेजेगा, जिससे मौके पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
परियोजना की एक विशेषता यह भी है कि पीयर-टू-पीयर वायरलेस तकनीक के माध्यम से दूरस्थ जंगलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। मैनपुर क्षेत्र में उपलब्ध 4जी और 5जी नेटवर्क को 15 से 20 किलोमीटर दूर स्थित एंटी-पोचिंग कैंपों और वन चौकियों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे निर्बाध वीडियो स्ट्रीमिंग और रियल-टाइम निगरानी संभव होगी।
वन विभाग में सीमित मानव संसाधन को देखते हुए यह एआई आधारित निगरानी प्रणाली फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में कार्य करेगी। इससे गश्त की क्षमता बढ़ेगी, निगरानी में अंतराल कम होंगे और संवेदनशील क्षेत्रों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सकेगी।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व पहले से ही थर्मल ड्रोन, उपग्रह चित्रों और गूगल अर्थ इंजन आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण तकनीक का उपयोग वन्यजीव संरक्षण, अवैध शिकार की रोकथाम, अतिक्रमण की पहचान, वनाग्नि प्रबंधन और वन आवरण की निगरानी के लिए कर रहा है। नई एआई प्रणाली इन प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाएगी।
पिछले चार वर्षों में रिजर्व ने 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है तथा 500 से अधिक तस्करों और शिकारियों को गिरफ्तार किया है। बेहतर संरक्षण और तकनीकी निगरानी के कारण यहां बाघ, हाथी, मालाबार पाइप हॉर्नबिल, भारतीय विशाल गिलहरी, उड़न गिलहरी, इंडियन पैराडाइज फ्लायकैचर, पेरेग्रीन फाल्कन, ऊदबिलाव और ट्राइकारिनेट हिल टर्टल जैसी दुर्लभ प्रजातियों का भी दस्तावेजीकरण हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्मार्ट निगरानी नेटवर्क मध्य भारत में एआई आधारित वन संरक्षण की सबसे उन्नत पहलों में से एक है और भविष्य में देश के अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए भी मॉडल बन सकता है। परियोजना के तहत प्रत्येक टावर, पी2पी कनेक्टिविटी प्रणाली, एआई कैमरा और आवश्यक संरचना पर लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये की लागत आएगी।

