PTV BHARAT लखनऊ l लखनऊ वैसे तो चुनाव में मतदाता किस पक्ष में रहते हैं, यह तो चुनाव परिणाम के बाद पता चलेगा, लेकिन बसपा ने लखनऊ संसदीय सीट पर मुस्लिम कार्ड खेलकर सपा कांग्रेस गठबंधन की मुश्किलें बढ़ाने का काम किया है। यहां गठबंधन की सीट सपा के खाते में गई है और सपा मुस्लिम मतों को परम्परागत मत मानकर यह गुणा-भाग लगा रही थी कि चुनाव में कांग्रेस की तरफ झुकाव रखने वाले मुस्लिम भी गठबंधन के साथ आएंगे तो चुनाव उनके पक्ष में बन सकता है, लेकिन बुधवार को बसपा ने सरवर मलिक को मैदान में उतारकर यह संकेत दे दिया है कि वह भी मुस्लिम मतों के अलावा परम्परा मतों के साथ मैदान में हैं। सपा और कांग्रेस के रणनीतिकार भी मानते हैं कि पहले भी बसपा ने मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारकर अलग-अलग मैदान में उतरने वाली कांग्रेस और सपा के मतों में सेंधमारी करने का ही काम किया था। 2019 लोकसभा चुनाव में सपा से गठबंधन के कारण बसपा ने लखनऊ संसदीय सीट से उम्मीदवार नहीं उतारा था, जबकि इससे पहले 2014 चुनाव में नकुल दुबे बसपा उम्मीदवार थे, उन्हें 64,449 मत मिले थे। 2009 के चुनाव में डा. अखिलेश दास गुप्ता ने बसपा के मतों की संख्या बढ़ा दी थी और उन्हें 1,33,610 मत मिले थे। 2004 में भी बसपा ने नासिर अली सिद्दीकी को मैदान में उतारा था, जिन्हें 53,566 मत मिले थे। 1999 में भी बसपा ने इजाहुलहक को मैदान में उतारा था, वह 43,948 मत पाए थे। राजनाथ सिंह की हैट्रिक की लड़ाई : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जीत की हैट्रिक बनाने के लिए मैदान में हैं, जबकि समाजवादी कांग्रेस गठबंधन से रविदास मेहरोत्रा उम्मीदवार हैं, रविदास मध्य विधानसभा सीट से सपा के विधायक भी हैं।राजेश कुमार उर्फ मनोज प्रधान को बसपा से मोहनलालगंज से उम्मीदवार बनाया गया है। वे बसपा के सेक्टर प्रभारी का पद संभाल चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2015 में लखनऊ से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा था, वे दूसरे नंबर पर रहे थे।
लखनऊ सीट पर बसपा ने खेला मुस्लिम कार्ड, बढ़ सकती हैं गठबंधन की मुश्किलें
