महासमुंद : एमबीए कर मोहन चंद्राकर ने खेती को बनाया मॉडल

PTV BHARAT 18 AUGUST 2026 – महासमुंद : एमबीए कर मोहन चंद्राकर ने खेती को बनाया मॉडल – महासमुंद जिले के ग्राम केशवा निवासी मोहन चंद्राकर आज प्रगतिशील एवं नवाचारी किसान के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। एमबीए की शिक्षा के बाद वर्ष 1997 से 2013 तक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करने वाले चंद्राकर ने वर्ष 2013 में खेती की ओर लौटकर कृषि को व्यवसाय के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया।

मोहन चंद्राकर जैविक एवं प्राकृतिक पद्धति से खेती करते हुए पारंपरिक, सुगंधित और औषधीय गुणों वाली फसलों को बढ़ावा दे रहे हैं। उनके प्रक्षेत्र में जावफूल, विष्णुभोग, जोहा, चखव, संजवनी, पीहू पर्पल राइस तथा काला गेहूं जैसी फसलों का उत्पादन किया जा रहा है। अपनी उपज का प्रसंस्करण वे स्वयं की राइस मिल में कर ‘तथास्तु – अच्छे लोग, अच्छा भोजन’ ब्रांड के माध्यम से बाजार तक पहुंचाते हैं।

300 किसानों को जोड़कर बनाया किसान मॉडल

वर्ष 2017 में उन्होंने तथास्तु फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (ऊर्जा कृषि एफपीओ) का गठन कर करीब 300 किसानों को जोड़ा। वे किसानों को आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव के लिए मार्गदर्शन दे रहे हैं। इससे अनेक किसानों की आय में वृद्धि हुई है।

खरीफ 2026 में वे कृषि विज्ञान केंद्र महासमुंद एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में पारंपरिक सुगंधित धान की किस्मों के पुनरुत्थान पर भी काम कर रहे हैं।

बंजर जमीन को बनाया हरित क्षेत्र

चंद्राकर ने अपने लगभग 6 एकड़ बंजर क्षेत्र में 400 ऑस्ट्रेलियन टीक के पौधे लगाए थे, जो अब 20 से 30 फीट तक ऊंचे हो चुके हैं। वर्ष 2024 से वे सफेद चंदन के 200 पौधों के साथ आम, महुआ, जामुन, चीकू, अमरूद और अन्य फलदार एवं उपयोगी वृक्षों का संरक्षण और रोपण भी कर रहे हैं।

वे वृक्षारोपण को आने वाली पीढ़ी के लिए ‘फिक्स्ड डिपॉजिट’ मानते हैं। उनका मानना है कि आज लगाए गए पेड़ भविष्य में पर्यावरण और समाज दोनों के लिए मूल्यवान संपत्ति बनेंगे।

राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

कृषि क्षेत्र में मोहन चंद्राकर के नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वर्ष 2018 में आईसीएआर, नई दिल्ली में उन्हें श्रेष्ठ नवाचारी किसानों के साथ संवाद का अवसर मिला। अप्रैल 2026 में उन्हें ‘राइस आइकॉन ऑफ इंडिया सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वहीं 4 जून 2026 को रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें ‘नवाचार एवं प्रगतिशील किसान सम्मान’ से सम्मानित किया।

मोहन चंद्राकर की कहानी बताती है कि आधुनिक प्रबंधन की सोच, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, प्रसंस्करण और मजबूत बाजार रणनीति को कृषि से जोड़ा जाए तो खेती केवल आजीविका नहीं, बल्कि एक सफल और टिकाऊ व्यवसाय का मॉडल भी बन सकती है।

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