उत्तर बस्तर कांकेर : डायबिटीज टाइप-1 मरीजों के लिए पियर ग्रुप आधारित कार्यशाला आयोजित

PTV BHARAT 19 AUGUST 2026 – उत्तर बस्तर कांकेर : डायबिटीज टाइप-1 मरीजों के लिए पियर ग्रुप आधारित कार्यशाला आयोजित – स्वास्थ्य विभाग द्वारा टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और उनके माता-पिता के लिए एक दिवसीय पियर ग्रुप चर्चा आधारित कार्यशाला आयोजित की गई। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल, अलबेला पारा कांकेर में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों एवं अभिभावकों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य बीमारी के प्रबंधन, नियमित जांच और आवश्यक सावधानियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

कार्यशाला में दिल्ली से आईं ज्योत्सना रंगीन और रायपुर से उज्जवल व्यास ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और उनके माता-पिता का उत्साहवर्धन करते हुए बीमारी के साथ बेहतर तरीके से जीवन जीने और नियमित स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए प्रेरित किया।

45 बच्चों को निःशुल्क ग्लूकोमीटर और इंसुलिन पेन सेट

कार्यशाला के बाद उपस्थित सभी 45 टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों को रक्त में शर्करा स्तर की नियमित जांच के लिए ग्लूकोमीटर, ग्लूकोस्ट्रिप, लैंसेट और इंसुलिन पेन सेट निःशुल्क वितरित किए गए।

एनसीडी सेल के जिला सलाहकार डॉ. योगेश प्रजापति ने बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.सी. ठाकुर के निर्देशानुसार विलियम क्लिंटन फाउंडेशन के सहयोग से यह कार्यशाला आयोजित की गई।

क्या है टाइप-1 डायबिटीज

कार्यशाला में बताया गया कि टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ सकता है और मरीजों को इंसुलिन की आवश्यकता होती है।

इसके प्रमुख लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, लगातार थकान, अधिक भूख लगना और वजन कम होना शामिल हो सकते हैं। बीमारी के प्रबंधन में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार इंसुलिन लेना, रक्त शर्करा की नियमित जांच, संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण हैं।

बच्चों और अभिभावकों को दी गई आवश्यक जानकारी

कार्यशाला के दौरान बच्चों और उनके माता-पिता को आहार-विहार, नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग, उपचार और आवश्यक सावधानियों के संबंध में जानकारी दी गई। अस्पताल अधीक्षक डॉ. विमल भगत और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत नाग ने भी प्रतिभागियों को बीमारी के प्रबंधन से जुड़े आवश्यक सुझाव दिए।

कार्यशाला ने बच्चों और उनके अभिभावकों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने तथा बीमारी के बेहतर प्रबंधन के लिए सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराया।

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