PTV BHARAT 21 AUGUST 2026 – एमसीबी : कृषि से मत्स्य पालन तक का सफर, अरविंद सिंह ने इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग से खड़ी की 8 लाख से अधिक वार्षिक आय की मिसाल – ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में कृषि के साथ मत्स्य पालन और पशुपालन जैसी गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के ग्राम ताराबहरा निवासी मत्स्य कृषक अरविंद सिंह ने पारंपरिक कृषि से आगे बढ़कर इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग को अपनाया है। आज उनके फार्म पर मत्स्य पालन, मछली बीज उत्पादन, हैचरी, सूकर एवं कुक्कुट पालन जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इनसे उन्हें 8 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है और 15 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है।
सीमित कृषि आय ने दिखाई नई राह
अरविंद सिंह की शुरुआती आय मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर थी। मेहनत और लागत के अनुरूप अपेक्षित लाभ नहीं मिलने पर उन्होंने अतिरिक्त आय के साधनों की तलाश शुरू की। इसी दौरान उन्होंने मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाया और धीरे-धीरे अपने फार्म को इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग मॉडल में विकसित किया।
वर्तमान में उनके फार्म में 5-6 नर्सरी तालाब, 2 ब्रुडर तालाब और स्टॉकिंग तालाब हैं। नर्सरी तालाबों में मत्स्य बीजों का प्रारंभिक पालन, ब्रुडर तालाबों में प्रजनन योग्य मछलियों का रखरखाव और स्टॉकिंग तालाबों में मछलियों का उत्पादन किया जाता है।
हैचरी और मत्स्य बीज उत्पादन से बढ़े आय के स्रोत
अरविंद सिंह के फार्म पर स्वयं की मत्स्य हैचरी भी है, जहां इंडियन मेजर कार्प, एक्सोटिक कार्प सहित विभिन्न प्रजातियों के मत्स्य बीज तैयार किए जाते हैं। पंगासियस मछली के स्पॉनिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।
उन्होंने कतला मछली में क्रॉस ब्रीडिंग का प्रयास कर मत्स्य उत्पादन की नई संभावनाएं तलाशने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। फार्म पर जल गुणवत्ता की नियमित जांच तथा मछलियों के स्वास्थ्य और वृद्धि की निगरानी की जाती है।
मत्स्य विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से मिली मजबूती
अरविंद सिंह वर्ष 2022 से मत्स्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ लेकर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों से उन्हें मत्स्य पालन, बीज उत्पादन, हैचरी संचालन, स्पॉनिंग और तालाब प्रबंधन से संबंधित तकनीकी जानकारी मिलती रही है।
उन्हें जाल वितरण योजना सहित विभागीय योजनाओं का भी लाभ मिला है। सरकारी सहयोग, तकनीकी जानकारी और अपने अनुभव को जोड़कर उन्होंने मत्स्य पालन को व्यवस्थित व्यवसाय में बदल दिया।
इंटीग्रेटेड मॉडल बना सफलता का आधार
अरविंद सिंह ने मछली पालन के साथ सूकर और कुक्कुट पालन को भी जोड़ा है। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है और एक ही फार्म से आय के कई स्रोत विकसित हुए हैं।
इस एकीकृत मॉडल से उत्पादन लागत को नियंत्रित करने और अलग-अलग गतिविधियों से आमदनी बढ़ाने में मदद मिली है। वर्तमान में फार्म की विभिन्न गतिविधियों से उन्हें सालाना 8 लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है।
15 से अधिक लोगों को मिला रोजगार
फार्म की विभिन्न गतिविधियों के संचालन से 15 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ग्रामीण युवाओं और किसानों के बीच मत्स्य आधारित व्यवसाय को लेकर रुचि भी बढ़ रही है।
फार्म के विस्तार की तैयारी
आर्थिक स्थिति में सुधार के बाद अरविंद सिंह अब अपने फार्म का और विस्तार करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका लक्ष्य भविष्य में मत्स्य बीज उत्पादन और मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के और अवसर विकसित करना है।
अरविंद सिंह की सफलता बताती है कि वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीक, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और सही तकनीकी मार्गदर्शन से मत्स्य पालन को स्थायी एवं लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है। ग्राम ताराबहरा का उनका फार्म आज बहुआयामी आजीविका, वैज्ञानिक मत्स्य पालन और ग्रामीण रोजगार सृजन का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है।

