PTV BHARAT 21 AUGUST 2026 – कोरिया : विशेष लेख – सौर सुजला योजना से किसानों के खेतों तक पहुंची सूरज की रोशनी, बढ़ी सिंचाई की ताकत – छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था किसानों के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने और आय के नए अवसर तैयार करने का माध्यम बन रही है। सौर सुजला योजना, जिसे प्रदेश में 1 नवंबर 2016 को शुरू किया गया था, के तहत किसानों के खेतों में 3 एचपी और 5 एचपी क्षमता के सोलर सिंचाई पंप स्थापित किए जा रहे हैं। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में जहां विद्युत सुविधा सीमित है, वहां सोलर पंप सिंचाई का महत्वपूर्ण साधन बन रहे हैं।
कम अंशदान में सौर सिंचाई की सुविधा
योजना के तहत 3 एचपी सोलर पंप की औसत लागत करीब 2.64 लाख रुपये और 5 एचपी पंप की औसत लागत करीब 3.64 लाख रुपये बताई गई है। किसानों की श्रेणी के अनुसार हितग्राही अंशदान निर्धारित किया गया है।
3 एचपी पंप के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों का अंशदान 7 हजार रुपये, अन्य पिछड़ा वर्ग का 12 हजार रुपये और सामान्य वर्ग का 18 हजार रुपये है। 5 एचपी पंप के लिए यह अंशदान क्रमशः 10 हजार, 15 हजार और 20 हजार रुपये निर्धारित है। इसके अतिरिक्त निर्धारित प्रोसेसिंग शुल्क भी देय है।
सिंचाई बढ़ी तो फसल विविधता और आय भी बढ़ी
सोलर पंप किसानों को सिंचाई के लिए पारंपरिक बिजली व्यवस्था पर निर्भरता से राहत देते हैं। सिंचाई की सुविधा मिलने से किसान केवल धान तक सीमित रहने के बजाय मक्का, गेहूं, दलहन-तिलहन, गन्ना, सब्जियों और बागवानी फसलों की ओर भी बढ़ रहे हैं।
इससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर तैयार हो रहे हैं। दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में इसका प्रभाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है।
सौर ऊर्जा के साथ जल संरक्षण पर भी जोर
योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू जल संरक्षण भी है। सौर सिंचाई पंपों के माध्यम से सिंचाई गतिविधियों का बेहतर प्रबंधन होने से भूजल संरक्षण और संवर्धन में सहायता मिलने की बात कही गई है।
गौठानों और चारागाहों में भी पशुधन के लिए पेयजल, सिंचाई एवं अन्य आवश्यक उपयोगों को ध्यान में रखते हुए सोलर पंप स्थापित किए जा रहे हैं। इससे कृषि और पशुधन आधारित ग्रामीण गतिविधियों को भी समर्थन मिल रहा है।
पांच साल की वारंटी और रखरखाव की सुविधा
सौर सिंचाई पंप एवं स्थापित उपकरणों पर पांच वर्ष की ऑन-साइट वारंटी और पांच वर्ष की बीमा सुविधा का प्रावधान है। चोरी, क्षति या टूट-फूट की स्थिति में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार संयंत्र की मरम्मत की व्यवस्था भी है।
सोलर सिंचाई संयंत्रों के पांच वर्षीय संचालन, संधारण और रखरखाव का प्रावधान किया गया है। क्रेडा के जिला, क्षेत्रीय एवं जोनल कार्यालयों द्वारा स्थापित संयंत्रों का निरीक्षण भी किया जाता है।
शिकायतों के लिए टोल-फ्री व्यवस्था
सौर पंप से संबंधित शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल फ्री नंबर 18001234591 उपलब्ध है। शिकायतों की ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से निगरानी की जाती है और संबंधित स्थापना इकाई द्वारा निर्धारित अवधि में उनका निराकरण किया जाता है।
आवेदन से स्थापना तक तय प्रक्रिया
योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास स्वयं की कृषि भूमि और पर्याप्त जल स्रोत होना आवश्यक है। किसान ग्राम सेवक, कृषि विभाग या क्रेडा कार्यालय से आवेदन प्राप्त कर सकते हैं।
कृषि विभाग द्वारा आवेदन की जांच और अनुशंसा के बाद क्रेडा स्थल सर्वेक्षण कर सोलर पंप की क्षमता एवं प्रकार का आकलन करता है। निर्धारित हितग्राही अंशदान और प्रोसेसिंग शुल्क जमा होने के बाद स्थापना की स्वीकृति जारी की जाती है और संबंधित इकाई द्वारा सोलर पंप स्थापित किया जाता है।
सौर ऊर्जा से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
सौर सुजला योजना के माध्यम से सिंचाई सुविधा बढ़ने से कृषि उत्पादन, फसल विविधीकरण और किसानों की आय में वृद्धि के अवसर बढ़ रहे हैं। सूरज की ऊर्जा को सिंचाई के साधन में बदलकर यह योजना ऊर्जा, जल और कृषि के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आ रही है।

