कोरबा : हुनर से आत्मनिर्भरता की नई पहचान, धान-चावल से बनी राखियों ने बटोरी सराहना

PTV BHARAT 25 AUGUST 2026 – कोरबा : हुनर से आत्मनिर्भरता की नई पहचान, धान-चावल से बनी राखियों ने बटोरी सराहना – कोरबा जिले की महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं स्थानीय संसाधनों और अपनी रचनात्मकता से आकर्षक राखियां तैयार कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। बेला कछार, दोन्द्रों पंचायत का प्रसन्न स्व-सहायता समूह धान, चावल, बर्रे भाजी और साबूदाना जैसी स्थानीय सामग्री से अनोखी राखियां तैयार कर रहा है।

2018 से बिहान से जुड़ा 22 सदस्यीय समूह

प्रसन्न स्व-सहायता समूह वर्ष 2018 से बिहान से जुड़ा हुआ है और इसमें 22 महिला सदस्य हैं। समूह की महिलाएं बाती, अगरबत्ती, कॉस्मेटिक सामग्री और कपड़ों से जुड़े विभिन्न काम करती हैं।

रक्षाबंधन के अवसर पर उन्होंने स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों को रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल कर राखियों को नया स्वरूप दिया है।

शहर में लगाया राखियों का स्टॉल

समूह की सदस्य नीतू कर्ष और मीरा देवांगन शहर में राखियों का स्टॉल लगाकर इन आकर्षक उत्पादों की बिक्री कर रही हैं। स्थानीय सामग्री से तैयार राखियां लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

‘विष्णु भैया’ के लिए भी तैयार की विशेष राखी

समूह की महिलाओं ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के लिए भी विशेष राखी तैयार की है। महिलाओं ने महतारी वंदन योजना से मिल रहे सहयोग के लिए मुख्यमंत्री को ‘विष्णु भैया’ कहते हुए आभार व्यक्त किया।

स्थानीय संसाधनों से रोजगार और आत्मनिर्भरता

प्रसन्न स्व-सहायता समूह की पहल दिखाती है कि स्थानीय संसाधनों, रचनात्मकता और सामूहिक प्रयास को बाजार से जोड़कर महिलाएं कम लागत में नए आजीविका अवसर तैयार कर सकती हैं।

धान-चावल से बनी ये राखियां सिर्फ रक्षाबंधन की सजावट नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के हुनर, मेहनत और आत्मनिर्भर बनने की कोशिश की पहचान बनकर सामने आई हैं।

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