PTV BHARAT 29 SEPTEMBER 2026 – दंतेवाड़ा : विशेष लेख : जावंगा एजुकेशन सिटी से देश को नई राह दिखा रहे बस्तर के जनजातीय बच्चे – दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के जावंगा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी आज जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल, खेल और आत्मविश्वास का बड़ा केंद्र बन चुकी है। कभी हिंसा और गरीबी से प्रभावित दूरस्थ गांवों के बच्चों के सामने सुरक्षित शिक्षा और आगे बढ़ने के सीमित अवसर थे, लेकिन आज यहां की बेटियां NEET-UG पास कर डॉक्टर बनने की राह पर हैं, युवा S&P Global जैसी वैश्विक कंपनियों में रोजगार हासिल कर रहे हैं और खिलाड़ी आधुनिक सुविधाओं के बीच अपनी प्रतिभा निखार रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 9 मई 2015 को जावंगा पहुंचकर एजुकेशन सिटी का निरीक्षण किया था और विद्यार्थियों से संवाद किया था।
150 एकड़ में शिक्षा और अवसरों का परिसर – छत्तीसगढ़ सरकार की इस महत्वपूर्ण पहल के करीब 150 एकड़ परिसर में 43 शैक्षणिक और आवासीय संस्थाएं संचालित हैं। यहां 7,436 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 4,692 बालिकाएं शामिल हैं। इनमें 5,370 बच्चे छात्रावासों में रहकर पढ़ाई करते हैं। दूर-दराज के जंगलों और गांवों से आने वाले बच्चों को आवास, भोजन, शिक्षा और मार्गदर्शन एक ही परिसर में मिलता है। इसके परिणामस्वरूप स्कूल ड्रॉप-आउट दर 50 प्रतिशत से घटकर 13 प्रतिशत रह गई है।
जनजातीय बेटियों का डॉक्टर बनने का सपना – ‘छू लो आसमान’ कन्या आवासीय कोचिंग सेंटर, कारली की कई छात्राओं ने इस वर्ष NEET-UG में सफलता हासिल की है। इन्हें राज्य के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, आयुर्वेद, दंत चिकित्सा और पशु चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश मिला है। कभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक से वंचित इलाकों की इन बेटियों की सफलता उनके परिवारों के लिए बड़ी उपलब्धि है।
डिजिटल कौशल से वैश्विक कंपनियों तक पहुंच – नवगुरुकुल में युवाओं को आधुनिक डिजिटल कौशल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां से प्रशिक्षित करीब 100 युवा डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार हासिल कर चुके हैं। एक छात्रा का चयन S&P Global में डेटा एनालिटिक्स के पद पर हुआ है। वहीं ITI में डीजल मैकेनिक, फिटर, वेल्डर और इलेक्ट्रिकल जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण लेने वाले 95 प्रतिशत विद्यार्थी जनजातीय समुदाय से हैं।
खेलों में भी निखर रही प्रतिभा – एजुकेशन सिटी के ‘एकलव्य खेल परिसर’ में ओलंपिक स्तर का स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग, तीरंदाजी और इंडोर स्टेडियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ‘खेलो इंडिया’ से जुड़े इस परिसर में करीब 4,000 आदिवासी बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं। खेल प्रशिक्षण के साथ उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित हो रही है।
बालिका शिक्षा और सुरक्षित भविष्य पर जोर – जावंगा एजुकेशन सिटी में बालिका शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। कन्या विद्यालयों और छात्रावासों के माध्यम से ग्रामीण बेटियां सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर रही हैं। ‘स्वामी आत्मानंद स्कूल’ में करीब 1,200 छात्राएं कला, विज्ञान और वाणिज्य की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। आवास, भोजन, लाइब्रेरी और लैब जैसी सुविधाओं ने अभिभावकों का भरोसा मजबूत किया है।
दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जैसे पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के अनाथ और हिंसा पीड़ित बच्चों को आस्था विद्या मंदिर ने सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया है। यहां बच्चों की जरूरत और परिस्थितियों के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। उन्हें शिक्षा, खेल, संगीत और सुरक्षित बचपन का अवसर मिल रहा है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान – जावंगा एजुकेशन सिटी की पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। KPMG ने इसे दुनिया की 100 नवोन्मेषी परियोजनाओं में शामिल किया है, जिनमें भारत से छह परियोजनाएं चुनी गई थीं। दंतेवाड़ा प्रशासन को इस पहल के लिए ‘प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार’ भी मिल चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जावंगा का दौरा कर इस मॉडल की सराहना कर चुके हैं।
जावंगा एजुकेशन सिटी आज बस्तर के जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल, खेल और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर देने वाला परिसर बन चुकी है।

