PTV BHARAT 01 OCTOBER 2026 – धमतरी : ‘रिफॉर्म उत्सव’ से गांव-गांव पहुंचेंगे वाटरशेड विकास सुधार – छत्तीसगढ़ शासन एवं भारत सरकार की पहल के तहत वाटरशेड विकास को अधिक प्रभावी, सहभागी और नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से जिले में ‘रिफॉर्म उत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। इसके माध्यम से वाटरशेड विकास से जुड़े सुधारों, प्रावधानों और उनके लाभों की जानकारी ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाई जाएगी। अभियान का उद्देश्य जल एवं मृदा संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए सामुदायिक स्वामित्व को मजबूत करना है।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत इस पहल को जन योजना अभियान (PPC) ‘सबकी योजना, सबका विकास’ के साथ एकीकृत किया जा रहा है। इसकी शुरुआत 02 अक्टूबर 2026 से ग्राम सभाओं के माध्यम से होगी। जिले की लगभग 16 ग्राम पंचायतों में वाटरशेड विकास परियोजना से जुड़े सुधारों, गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाई जाएगी। इसके बाद राज्य, जिला तथा PMKSY-WDC 2.0 परियोजना स्तर पर ‘रिफॉर्म उत्सव’ की गतिविधियां आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है।
मिट्टी का संरक्षण, पानी का संचयन—समृद्ध खेती की मजबूत नींव – वाटरशेड विकास का उद्देश्य मृदा एवं जल संरक्षण, वर्षा जल का बेहतर प्रबंधन, भू-क्षरण में कमी और कृषि योग्य भूमि की उत्पादकता बढ़ाना है। विशेष रूप से सूखा प्रभावित एवं वर्षा आधारित क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने से कृषि गतिविधियों को मजबूती मिलती है। इससे ऐसे क्षेत्रों में भी फसल उत्पादन की संभावनाएं बढ़ती हैं, जहां पहले किसान एक फसल भी नहीं ले पाते थे। वहीं, एक फसल वाले क्षेत्रों में दूसरी या अतिरिक्त फसल लेने के अवसर विकसित हो रहे हैं।
अधिक प्रावधान, बेहतर परिणाम की दिशा में सुधार – वाटरशेड विकास कार्यक्रम में परियोजना क्षेत्रों के लिए प्रति हेक्टेयर उपलब्ध राशि में वृद्धि की गई है। मैदानी क्षेत्रों में यह राशि 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 22 हजार रुपये और पहाड़ी एवं कठिन क्षेत्रों में 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 28 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है। इससे मृदा एवं जल संरक्षण, जलस्रोतों के विकास और खेत स्तर पर आवश्यक कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में सहायता मिलेगी।
कम समय में पूरा होगा काम, किसानों को जल्दी मिलेगा लाभ – वाटरशेड परियोजनाओं की अवधि 7 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष की गई है। इससे मृदा एवं जल संरक्षण से जुड़े कार्य अपेक्षाकृत कम समय में पूरे किए जा सकेंगे और परियोजना के लाभ ग्रामीण समुदाय एवं किसानों तक शीघ्र पहुंचेंगे। जल उपलब्धता में वृद्धि, मृदा कटाव में कमी और भूमि की उत्पादकता में सुधार से कृषि गतिविधियों को मजबूती मिलने की संभावना है।
उन्नत कृषि गतिविधियों से आय वृद्धि पर जोर – वाटरशेड क्षेत्रों में जल उपलब्धता एवं मृदा नमी में सुधार के साथ कृषि को अधिक उत्पादक और विविधतापूर्ण बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। गुणवत्तापूर्ण बीज, उन्नत कृषि उपकरण, फसल विविधीकरण, बागवानी, कृषि वानिकी तथा स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप उत्पादन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लाभों को खेत स्तर की कृषि गतिविधियों से जोड़ना है।
वाटरशेड विकास को जन आंदोलन का स्वरूप देने की पहल – वाटरशेड विकास में समुदाय की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण मानते हुए देशभर में ‘वाटरशेड यात्रा’ और ‘वाटरशेड महोत्सव’ जैसी पहलें आयोजित की गई हैं। इनके माध्यम से जल एवं मृदा संरक्षण कार्यों में ग्रामीण समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और निर्मित जल संरक्षण संरचनाओं के दीर्घकालिक रखरखाव में सामुदायिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
‘फाइल से लाइफ’ तक पहुंचे सुधार – धमतरी जिले में कृषि विभाग द्वारा जिला एवं परियोजना स्तर पर वाटरशेड विकास कार्यक्रम से जुड़े मैदानी अमले को सक्रिय करते हुए ‘रिफॉर्म उत्सव’ में अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों को वाटरशेड सुधारों की जानकारी देने के साथ स्थानीय आवश्यकताओं, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर संवाद किया जाएगा।
वाटरशेड विकास का व्यापक लक्ष्य योजनाओं को कागज और फाइलों से आगे ले जाकर उनके वास्तविक लाभ खेत, जलस्रोत और ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाना है। विकसित भारत @ 2047 की दिशा में सूखा-मुक्त और जल-सुरक्षित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ वाटरशेड सुधारों को गांव-गांव पहुंचाने तथा समुदाय को इसके केंद्र में रखने का प्रयास किया जा रहा है।
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