PTV BHARAT 12 OCTOBER 2026 – बस्तर : रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण से आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं, सुपोषण अभियान को मिल रही मजबूती
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश में कुपोषण दूर करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि कुपोषण और एनीमिया की समस्या दूर करने में मदद मिल सके।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस मिशन से जुड़कर महिलाएं विभिन्न आजीविकामूलक गतिविधियों के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम तूरेनार की प्रगति महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण और पैकेजिंग के जरिए इस बदलाव की मिसाल पेश कर रही हैं।
बिहान मिशन से मिली नई पहचान, पोषण आहार निर्माण बना आजीविका का माध्यम
प्रगति महिला स्व-सहायता समूह की सचिव मायावती बघेल ने बताया कि उनका समूह वर्ष 2025 से रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण का कार्य कर रहा है। समूह में कुल 12 महिलाएं सदस्य हैं, जो सावधानी, स्वच्छता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए पोषण आहार तैयार करती हैं।
इस कार्य से महिलाओं को नियमित रोजगार मिल रहा है। साथ ही, वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं तक पौष्टिक आहार पहुंचाने में भी योगदान दे रही हैं।
पौष्टिक सामग्रियों से तैयार हो रहा मीठा शक्ति आहार और नमकीन दलिया
मायावती बघेल ने बताया कि पोषण आहार तैयार करने के लिए गेहूं, रागी, सोयाबीन, मूंग दाल, मूंगफली, तेल और गुड़ जैसी पौष्टिक सामग्रियों का निर्धारित अनुपात में मिश्रण तैयार किया जाता है। इससे बच्चों के लिए ‘मीठा शक्ति आहार’ तथा महिलाओं और किशोरियों के लिए ‘नमकीन दलिया’ जैसे पोषण उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इसके बाद इनकी पैकेजिंग की जाती है। निर्माण प्रक्रिया के दौरान स्वच्छता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
15 समूहों के माध्यम से 409 आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंच रहा पोषण आहार
समूह की सचिव के अनुसार, उनके द्वारा तैयार पोषण आहार जिले के 15 समूहों को वितरित किया जाता है। इन समूहों के माध्यम से यह सामग्री कुल 409 आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंच रही है। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित पोषण गतिविधियों को सहयोग मिल रहा है।
समूह की महिलाओं को खुशी है कि उनके परिश्रम से तैयार पोषण आहार बच्चों, महिलाओं और किशोरियों के बेहतर पोषण के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।
हर महीने 6 से 7 हजार रुपये की आमदनी से मजबूत हो रही आर्थिक स्थिति
मायावती बघेल ने बताया कि रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण कार्य से समूह की प्रत्येक सदस्य को प्रतिमाह लगभग 6 से 7 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। इस आय से महिलाएं अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं।
नियमित आमदनी से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार के आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी भी मजबूत हुई है। यह गतिविधि उनके लिए रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रहीं महिलाएं
प्रगति महिला स्व-सहायता समूह की यह पहल महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सरोकार का उदाहरण है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर महिलाएं सामूहिक प्रयासों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। साथ ही, बच्चों, महिलाओं और किशोरियों तक पोषण आहार पहुंचाकर सुपोषण के उद्देश्य में भी योगदान दे रही हैं।
यह पहल दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के अवसर और उचित मार्गदर्शन मिलने से वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, बल्कि समाज के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े महत्वपूर्ण उद्देश्यों की प्राप्ति में भी सक्रिय भागीदार बन सकती हैं।

