शताब्दी वर्ष में छत्तीसगढ़ प्रांत के 30 लाख से भी अधिक घरों में हुआ गृह संपर्क अभियान

PTV BHARAT 18 MARCH 2026 रायपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक हरियाणा में पानीपत के निकट समालखा में 13-15 मार्च को संपन्न हुई। बैठक में पूरे देशभर से 1438 प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में अखिल भारतीय कार्यकारिणी, क्षेत्र और प्रांत टोली, कार्यविभागों के प्रांत और क्षेत्र प्रमुख, विभाग प्रचारक, विभागों से निर्वाचित प्रतिनिधि और विविध संगठनों के अखिल भारतीय स्तर के अध्यक्ष, सचिव एवं संगठन मंत्री सम्मिलित होते है।बैठक में संघ के कार्य विस्तार, कार्य दृढ़ीकरण के साथ ही संघ स्थापना के शताब्दी वर्ष में संपन्न हुए कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में समाज का अपार स्नेह और समर्थन संघ को प्राप्त हुआ।

कार्यविस्तार

वर्तमान में देश के 924 जिलों के 6602 खंडों में से 6127 खंड शाखायुक्त है। इस वर्ष शाखायुक्त मंडलों की संख्या में 1535 की वृद्धि हुई, वर्तमान में 32,305 मंडल तथा 2523 नगर शाखायुक्त है। देशभर में कुल 55,683 स्थानों पर 40,800 विद्यार्थी और महाविद्यालयीन शाखा सहित कुल 88,949 शाखा है। कार्यकर्ताओं द्वारा 32,606 साप्ताहिक मिलन एवं 13,211 संघ मंडली संचालित की जा रही है। देशभर में 38,081 सेवाबस्तियों में से 9576 शाखायुक्त सेवाबस्तियाँ है। देशभर में कुल 105 संघ शिक्षावर्ग और कार्यकर्ता विकास वर्गों में 21,526 कार्यकर्ताओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

छत्तीसगढ़ प्रांत में 34 जिलों 1643 स्थानों में 2,188 शाखा लग रही हैं। इनमें विद्यार्थी संयुक्त शाखा 1,246, महाविद्यालयीन (केवल तरुण) 124, तरुण व्यावसायी शाखा 482, प्रौढ़ व्यावसायी शाखा 192, बाल शाखा 144 हैं। प्रांत में 833 साप्ताहिक मिलन लग रहे हैं। बड़े आयु के स्वयंसेवकों के मिलन की संख्या 155 है। संघ मंडली की संख्या 632 है। प्रांत में शाखा युक्त सेवा बस्तियों की संख्या 193 है। वहीं शाखायुक्त मंडल की संख्या 1053 है। शाखायुक्त नगर (अन्य) की संख्या 55 वहीं न्यूनतम 2 शाखा हैं ऐसे नगर की संख्या भी 55 है। रायपुर महानगर को 14 नगरों में बांटा गया है, जिसमें कुल 131 बस्ती हैं, जिनमें 204 शाखा लग रही हैं। प्रांत में 84 प्रांरभिक वर्ग में 3,890 स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। प्रांत में न्यूतनम 5 शाखा अवश्य हैं, ऐसे जिला केंद्रों की संख्या 26 हो चुकी है।

गृह संपर्क

अधिकाधिक घरों तक संघ की सौ वर्षों की यात्रा, संघ कार्य का परिचय और पंचपरिवर्तन के विषय को पहुँचाने हेतु गृहसम्पर्क अभियान चलाया गया। अभी तक 37 प्रांतों के 3,89,465 ग्रामों और 31,143 बस्तियों के 10 करोड़ से अधिक घरों पर संपर्क हो चुका है। अभी 11 प्रांतों में गृह संपर्क चल रहा है।छत्तीसगढ़ प्रांत में ग्रामीण क्षेत्र में 1560 मंडलों में तथा नगरीय क्षेत्र में 666 बस्ती में 19429  टोलियों के द्वारा61,686 कार्यकर्ताओं ने 30,55,557 घरों में गृह संपर्क किया गया। गृह संपर्क में नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में संघ की सौ वर्ष की यात्रा और समाज परिवर्तन में अपनी भूमिका से संबंधित पत्रक और पुस्तक तथा ग्रामीण क्षेत्रों में भारत माता के चित्र और पत्रक का वितरण भी किया।

विशेष संपर्क

छत्तीसगढ़ प्रांत में विशेष संपर्क अभियान में 20,326 लोगों से विशेष संपर्क किया गया।हिंदू समाज की सांस्कृतिक एकता व संगठित शक्ति, धर्म जागरण और पंच परिवर्तन को आचरण में लाने के उद्देश्य से स्थानीय समाज की आयोजन समितियों के द्वारा 37 प्रांतों  37,048 मंडल और बस्तियों में आयोजित हिंदू सम्मेलनों में साढ़े तीन करोड़ लोग सम्मिलित हुए।छत्तीसगढ़ प्रांत में हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन 1424 मंडल 13106 गांव तथा नगरीय क्षेत्र में610 बस्तियों में  कुल 2034हिन्दू सम्मेलन कार्यक्रम आयोजित हुए। इनमेंसहभागी संख्या पुरुष400020तथा मातृशक्ति 503976रही। इस तरह9,03,996लोगों की उपस्थिति इन कार्यक्रमों मेंरही। हिन्दू सम्मेलनों से पूर्व प्रभात फेरियां, मातृशक्ति की बैठकें, सुंदर कांड आदि के आयोजन भी संपन्न हुए।

सामाजिक सद्भाव बैठक

देशभर में सामाजिक और धार्मिक नेतृत्व में सामंजस्य एवं परस्पर सहयोग, दुर्बल समूहों के अभाव के निराकरण के उद्देश्य से सामाजिक सद्भाव बैठकों आयोजन खंड एवम नगर स्तर पर किया जा रहा है।प्रमुख जन गोष्ठीसंघकार्य, हिंदुत्व, वर्तमान परिस्थिति में अपनी भूमिका तथा पंच परिवर्तन आदि विषयों की वैचारिक स्पष्टता और दायित्व जागरण की दृष्टि से प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन आगामी अप्रैल माह किया जावेगा। इसी क्रम में पूजनीय सरसंघचालकजी के दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में व्याख्यानमाला और जिज्ञासा समाधान के कार्यक्रम संपन्न हुए। इन कार्यक्रमों में 40 से अधिक देशों के राजनयिकों सहित समाज की विभिन्न श्रेणियों के 4777 प्रभावी जन सम्मिलित हुए। छत्तीसगढ़ प्रांत में भी प्रमुख जन गोष्ठी के कार्यक्रम चल रहे हैं।

युवा कार्यक्रमयुवा पीढ़ी में राष्ट्र बोध, संगठन स्वभाव एवं समाज परिवर्तन के प्रयत्न की वृद्धि के उद्देश्य से युवा संगम कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ प्रांत में शताब्दी वर्ष में 142 खंडों में तथा 60 नगर में 202कार्यक्रम संपन्न हुए। इनमेंयुवकों की संख्या 14588रही वहींयुवतियों कीउपस्थित संख्या 9163रही। इस तरह23751 युवाओं ने युवा संवाद कार्यक्रमों में सहभागिता की।इन कार्यक्रमों में युवा नेतृत्व, युवा उद्यमी, अध्ययनशील युवाओं के बीच संघ और राष्ट्रीय विषयों पर विचार-विमर्श किया।

विजयादशमी उत्सवअखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में शताब्दी वर्ष में संपन्न कार्यक्रमों की संख्यात्मक और अनुभूति की दृष्टि से समीक्षा हुई। देशभर में संपन्न 62,555 उत्सवों में 32,45,141 स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में सम्मिलित हुए। छत्तीसगढ़ प्रांत में 1531 मंडल में 652 बस्ती में कुल 2193 कार्यक्रम संपन्न हुए। इसमें पूर्ण गणवेश में 94 हजार 995 लोगों की उपस्थिति रही।भौगोलिक रचना परिवर्तनकार्यविस्तार के फलस्वरूप कार्य संचालन और निर्णय प्रक्रिया के विकेंद्रीकरण के उद्देश्य से संघ की  भौगोलिक रचना में कुछ परिवर्तन किए गए है। नई भौगोलिक रचना में देश में नौ क्षेत्र और 85 संभाग होंगे। वर्तमान प्रांत व्यवस्था के स्थान मार्च 2027 से संभाग रचना कार्यरूप में प्रभावी होगी। संभाग और क्षेत्र रचना के बीच विविध आवश्यक सामाजिक विषयों और समस्या के चिंतन, योजना और कार्यान्वयन हेतु प्रदेश कार्यसमिति रहेगी। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का अधिवेशन अब से प्रति तीन वर्ष में एक बार आयोजित किया जावेगा।संत शिरोमणि सद्गुरु श्री रविदासजी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर सरकार्यवाहजी का वक्तव्यप्रतिनिधि सभा में संत शिरोमणि रविदासजी महाराज जी के प्राकट्य के 650 वें वर्ष में माननीय सरकार्यवाह जी ने वक्तव्य जारी किया। वक्तव्य में संघ की ओर से संत शिरोमणि सद्गुरु रविदासजी को श्रद्धासुमन अर्पित कराते हुए भक्ति जागरण, सात्विक आचरण, सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव उन्मूलन तथा  समरस समाज केदृढ़ीकरण में उनके कृतित्व का स्मरण किया गया है। संघ ने श्री रविदासजी के जीवन संदेश के मर्म को समझ कर, देश की एकता और समरसता के कार्य के संकल्प का आह्वान किया है।स्वयंसेवकों द्वारा समाज परिवर्तन के सकारात्मक प्रयासपंजाब में पिछले तीन वर्ष से नशा मुक्ति के लिये एक लाख से अधिक विद्यालय और महाविद्यालयों में नशा-मुक्ति का संकल्प कराया गया। धार्मिक नेतृत्व, साधु-संतों, कथावाचकों और डेरा प्रमुखों के साथ मिलकर व्यक्तिगत और सामाजिक समस्या नशे के विरुद्ध जनजागरण चल रहा है। कर्नाटक में हिंदू जागरण मंच द्वारा नशा मुक्ति के लिये 23 जिलों में 281 स्थानों पर रथयात्रा निकाली गयी। लड़कियों में नशे के विरुद्ध चेतना जागृत करने के उद्देश्य से मणिकर्णिका दौड़ का आयोजन किया गया। बजरंग दल ने नशा मुक्ति के लिये खिलाड़ियों, स्वास्थ्य अधिकारियों और नारकोटिक्स अधिकारियों और संतों के मिलकर 5600 से अधिक जनजागरण के कार्यक्रम किये। केरल में महामाघ महोत्सव, तमिलनाडु में कार्तिकदीपम और त्रिपुरा में जनजातीय समुदाय में जन्माष्टमी रथयात्रा द्वारा समाज में धार्मिक चेतना जागरण के कार्य में भी स्वयंसेवक लगे है। उत्तराखंड में परंपरागत कार्य करने वाले एवं श्रमजीवी कार्य करने वाली जातियों जैसे ढोल-सागर बजाने वाले, औषधियों की पहचान करने वाले, डोली-उपासक, मंत्रोपासक आदि का सम्मान एवं सम्मेलन द्वारा परंपरागत कौशल के सरंक्षण के अभिनव प्रयास किये जा रहे है। देशभर में इस वर्ष सवा लाख कुटुंब मित्र तथा लगभग ढाई लाख हरित घर बनाये गये। जनजाति क्षेत्र, नशा मुक्ति, शैक्षिक परिसर, घुमंतू जातियों, उद्योग, शिक्षा आदि क्षेत्रों में स्वयंसेवकों और विविध संगठनों द्वारा सकारात्मक और परिश्रमपूर्ण कार्य किए जा रहे है।प्रतिनिधि सभा में मणिपुर की स्थिति में तेजी से होते सुधार, नक्सलवाद से मुक्त होते बस्तर के साथ ही पड़ोसी देशों नेपाल और बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति पर भी चर्चा हुई। श्री गुरुतेग बहादुरजी के बलिदान के 350 वें वर्ष में पूरे देश में स्वयंसेवकों ने दो हज़ार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किये, जिनमें सात लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के समक्ष विभिन्न प्रांतों में संगठन एवं समाज परिवर्तन की दृष्टि से किए गए सफल और अनुपम प्रयोगों तथा समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय 38 संगठनों के विशेष कार्यों का वृत्त निवेदन भी हुआ।कार्यकारी मंडल बैठकइस वर्ष की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक आगामी अक्टूबर-नवंबर माह में इंदौर में होगी। इस बैठक में अखिल भारतीय  कार्यकारिणी सहित देश के सभी प्रांतों से 450 कार्यकर्ता आयेंगे।

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