PTV BHARAT 23 JUNE 2026 – रायपुर : उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखी दुर्लभ उड़न गिलहरी, संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता – छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और उत्साहजनक खबर सामने आई है। हाल ही में रिजर्व क्षेत्र में वन भ्रमण के दौरान दुर्लभ इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल (भारतीय उड़न गिलहरी) दिखाई दी है। इस दुर्लभ जीव की मौजूदगी को वन संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक आवासों के संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। वन विभाग द्वारा जंगलों की सुरक्षा, वन्यजीवों के संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहा है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बनता जा रहा है।
क्या है उड़न गिलहरी की विशेषता
इंडियन फ्लाइंग स्क्विरल वास्तव में पक्षियों की तरह उड़ती नहीं है। इसके आगे और पीछे के पैरों के बीच एक विशेष झिल्ली होती है, जिसकी सहायता से यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक हवा में फिसलते हुए लंबी दूरी तय कर सकती है।
यह एक निशाचर या रात्रिचर जीव है, जो दिन के समय पेड़ों के खोखलों या घने पत्तों के बीच विश्राम करती है और रात में भोजन की तलाश में बाहर निकलती है।
विशेषज्ञों के अनुसार उड़न गिलहरी केवल घने और सुरक्षित जंगलों में ही निवास करती है। इसलिए इसकी उपस्थिति किसी भी वन क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है।
वन विभाग की प्रतिबद्धता को मिली नई पहचान
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक वरुण जैन ने कहा कि उड़न गिलहरी का दिखाई देना वन विभाग के लिए गर्व का विषय है। यह रिजर्व क्षेत्र में किए जा रहे संरक्षण कार्यों की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और संरक्षण के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है।
इको-पर्यटन और जागरूकता को मिलेगा बढ़ावा
वन विभाग का मानना है कि इस दुर्लभ प्रजाति के दस्तावेजीकरण से छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। साथ ही विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय समुदायों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार इससे इको-पर्यटन को भी नई दिशा मिलने की संभावना है और प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ेगी।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में इंडियन फ्लाइंग स्क्विरल का दिखाई देना केवल एक दुर्लभ जीव की उपस्थिति नहीं, बल्कि राज्य में चल रहे संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योजनाबद्ध संरक्षण, सतत निगरानी और वन विभाग की प्रतिबद्धता से दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ की यह प्राकृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा और संरक्षण का महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगी।

