PTV BHARAT 20 AUGUST 2026 रायपुर-लाल किले से पीएम नरेन्द्र मोदी के भाषण और उसे लेकर पूर्व गृह मंत्री पी. चितंबरम द्वारा सोशल प्लेटफार्म पर मुझे ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है, जैसे बयान से राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। यह आग बस्तर तक पहुंच गई है। बुधवार को बस्तर शांति समिति की ओर तोमेश्वर सिन्हा ने मोतीबाग स्थित प्रेस क्लब में पीड़ितों के साथ पत्रकार वार्ता में पूर्व गृहमंत्री के बयान को लेकर आपत्ति दर्ज करवाते हुए माफी मांगने का आग्रह किया है। ऐसा नहीं करने की स्थिति में नक्सल हिंसा झेलने वाले परिवार दिल्ली में उग्र प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। राजधानी में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए श्री सिन्हा ने कहा कि जब देश के पूर्व गृहमंत्री ही नक्सल विचारधार और उनकी सोच को प्रोत्साहित करने वाले बयान देते हैं, तो बस्तर में रहने वाले पीड़ित परिवार की पीड़ा और बढ़ जाती है। आरती उइके ने बताया कि बस्तर अब अपने मूल जीवन शैली, कला और संस्कृति से जुड़ रहा है। वहां के लोगों का पहनावा, परंपरा अब जीवन का हिस्सा बन रही है। मेरे पति नक्सल हिंसा का शिकार बनें। हमने जो पीड़ा और हिंसा का दंश झेला है, चाहते है कि अब युवा पीढ़ि उस दलदल से दूर रहे। लेकिन राजनेता नक्सल समर्थन और उनकी मानसिकता को सही ठहराते हुए युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं।जब बस्तर में लोगों के बीच एक नई उम्मीद जगने लगी, तब एसी कमरे में बैठकर अनर्गल बयान देने वाले पूर्व गृहमंत्री की एक बार बस्तर में आकर देखना चाहिए। तब उन्हें पता चलेगा कि बयानबाजी
बस्तर शांति समिति ने पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री के बयान पर की आपत्ति
