गरियाबंद : रक्षाबंधन पर बिहान की दीदियों ने थामा स्वावलंबन का धागा

PTV BHARAT 21 AUGUST 2026 – गरियाबंद : रक्षाबंधन पर बिहान की दीदियों ने थामा स्वावलंबन का धागा – रक्षाबंधन इस वर्ष गरियाबंद जिले की बिहान से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं के लिए भाई-बहन के स्नेह के साथ स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर भी लेकर आया है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाएं स्थानीय एवं पारंपरिक सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। इनके विक्रय से महिलाओं को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है और वे स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की ओर बढ़ रही हैं।

मैनपुर में 5,340 रुपये की लागत से 11,258 रुपये की बिक्री

मैनपुर विकासखंड में स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा राखी निर्माण और विक्रय की गतिविधि संचालित की जा रही है। समूह ने 5,340 रुपये की लागत से राखियां तैयार कीं और अब तक 11,258 रुपये की बिक्री दर्ज की है।

धान-चावल से लेकर मूंगा और स्थानीय बीजों से बनी राखियां

विकासखंड गरियाबंद में संजीवनी संकुल संगठन जोबा से संबद्ध गायत्री स्व-सहायता समूह सढ़ौली की चार महिला सदस्य आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। समूह ने धान-चावल, मूंगा, मटर, झरगा, सेमी और अरहर सहित विभिन्न स्थानीय सामग्रियों से राखियों की अलग-अलग वैरायटी तैयार की है। इनकी कीमत 5 से 60 रुपये तक रखी गई है।

वहीं विकासखंड छुरा के ग्राम जामली स्थित जय भवानी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बांस से राखियां तैयार कर बाजार तक पहुंचाने की पहल की है। वर्ष 2026 में समूह ने करीब 1,000 राखियों का स्टॉक तैयार किया है।

फिंगेश्वर की दीदियों ने तैयार की 5 हजार राखियां

विकासखंड फिंगेश्वर के ग्राम पंचायत रोहिना की जय मां घटारानी स्व-सहायता समूह की सदस्य कोयल साहू ने विजय विकास महिला संकुल संगठन कौंदकेरा से जुड़कर इस वर्ष करीब 5,000 राखियां तैयार की हैं। इनमें 5 से 40 रुपये तक की विभिन्न डिजाइन वाली राखियां शामिल हैं।

समूह ने 10 हजार रुपये की लागत से राखियां तैयार कर अब तक 12 हजार रुपये की बिक्री की है। वर्तमान में करीब 4 हजार राखियां उपलब्ध हैं, जिनके विक्रय से अनुमानित रूप से 16 हजार रुपये तक लाभ मिलने की संभावना है।

सभी जनपद पंचायतों में लगाए जा रहे राखी स्टॉल

स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिले की सभी जनपद पंचायतों में केनोपी के माध्यम से राखी विक्रय स्टॉल लगाए जा रहे हैं। इन स्टॉलों पर नागरिकों को हस्तनिर्मित और स्थानीय सामग्री से तैयार राखियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।

जिला प्रशासन द्वारा आकांक्षा हाट में 21 से 28 अगस्त 2026 तक विशेष राखी विक्रय स्टॉल भी लगाया जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को व्यापक बाजार मिलने और उनकी बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।

पर्व से जुड़ा बाजार बना महिला उद्यमिता का जरिया

बिहान से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अब पारंपरिक आजीविका तक सीमित नहीं हैं। वे उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग, मूल्य निर्धारण और बाजार से जुड़ाव जैसी गतिविधियों के जरिए गैर-कृषि आधारित उद्यमिता की ओर भी आगे बढ़ रही हैं।

राखी निर्माण जैसी गतिविधियां महिलाओं को घर और गांव के स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के साथ उनके आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को भी मजबूत कर रही हैं।

जिला पंचायत गरियाबंद द्वारा बिहान के माध्यम से महिलाओं को उद्यमिता विकास, कौशल उन्नयन, वित्तीय समावेशन और बाजार उपलब्धता से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिला पंचायत ने नागरिकों से अपील की है कि रक्षाबंधन पर बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार स्थानीय राखियों और अन्य उत्पादों को प्राथमिकता देकर ग्रामीण महिला उद्यमियों के आर्थिक सशक्तिकरण में सहभागी बनें।

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