रायपुर : शिक्षक की पहल से शाला त्यागी दुर्गावती फिर लौटी शिक्षा की मुख्यधारा में

PTV BHARAT 21 AUGUST 2026 – सूरजपुर : शिक्षक की पहल से शाला त्यागी दुर्गावती फिर लौटी शिक्षा की मुख्यधारा में – शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और बच्चों की पढ़ाई किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो, इसके लिए सूरजपुर जिले में शिक्षक द्वारा की गई संवेदनशील पहल की प्रेरक मिसाल सामने आई है। ग्राम दवना की छात्रा दुर्गावती ने शिक्षक के निरंतर प्रयास, पालकों से संवाद और समझाइश के बाद दोबारा विद्यालय में प्रवेश लिया है।

विकासखंड शिक्षा अधिकारी अवधेश कुमार साहू के मार्गदर्शन में छात्रा का पुनः विद्यालय में दाखिला कराया गया। दुर्गावती ने वर्ष 2025 में पतरापाली से लगे ग्राम दवना स्थित प्राथमिक शाला भरूहमूड़ा से कक्षा 5वीं उत्तीर्ण की थी, लेकिन इसके बाद उसने आगे की पढ़ाई के लिए विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया था।

पालकों से संवाद कर जाना पढ़ाई छोड़ने का कारण

माध्यमिक शाला पतरापाली के शिक्षक योगेश साहू ने छात्रा और उसके पालकों से संपर्क कर पढ़ाई जारी नहीं रखने का कारण जाना। पालकों ने बताया कि छात्रा विद्यालय जाने के लिए तैयार नहीं थी और वह अपनी नानी के घर चली गई थी। जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण भी आगे प्रवेश कराने में कठिनाई आ रही थी।

शिक्षक ने लगातार छात्रा और उसके परिवार से संवाद करते हुए शिक्षा के महत्व, बच्चों के शिक्षा के अधिकार और अनिवार्य शिक्षा के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने पालकों को समझाया कि किसी भी परिस्थिति में बच्चे की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए और आवश्यक दस्तावेजों की व्यवस्था कर उसे नियमित विद्यालय भेजना चाहिए।

समझाइश का हुआ सकारात्मक असर

शिक्षक के प्रयासों का असर हुआ और दुर्गावती ने दोबारा पढ़ाई शुरू करने की इच्छा जताई। इसके बाद उसका विद्यालय में पुनः प्रवेश कराया गया। स्कूल लौटने के बाद छात्रा में पढ़ाई को लेकर उत्साह देखने को मिला।

पुनः प्रवेश के अवसर पर प्रधान पाठक के.के. यादव और शिक्षिका अनिता सिंह ने उसे निःशुल्क पुस्तक एवं गणवेश प्रदान किया। वहीं शिक्षक योगेश साहू ने अपने स्तर पर कॉपी और पेन उपलब्ध कराकर उसका उत्साह बढ़ाया, ताकि शिक्षण सामग्री के अभाव में उसकी पढ़ाई दोबारा बाधित न हो।

संवाद और संवेदनशीलता से बदली राह

दुर्गावती की कहानी बताती है कि शाला त्याग चुके बच्चों को केवल दोबारा प्रवेश दिलाना ही पर्याप्त नहीं है। परिवार से निरंतर संपर्क, संवाद और सही मार्गदर्शन भी उतना ही जरूरी है।

शिक्षक और विद्यालय परिवार ने दुर्गावती को नियमित विद्यालय आने तथा मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया। लंबे अंतराल के बाद स्कूल लौटी दुर्गावती अब नई ऊर्जा और उत्साह के साथ अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए तैयार है।

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