रायपुर : नेत्रदान को बढ़ावा देने के लिए अम्बेडकर अस्पताल में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

PTV BHARAT 22 AUGUST 2026 – रायपुर : नेत्रदान को बढ़ावा देने अम्बेडकर अस्पताल में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित – क्षेत्रीय नेत्र अनुसंधान संस्थान (RIO) एवं नेत्र रोग विभाग, पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर द्वारा ‘नेत्रदान प्रक्रियाओं पर नवीनतम जानकारी’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के टेलीमेडिसिन हॉल में हुआ।

कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए नेत्र सहायक अधिकारियों और सहायक नेत्रदान अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। स्वास्थ्य सेवा संचालनालय द्वारा 32 जिलों से प्रतिभागियों का नामांकन किया गया था और 100 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।

नेत्रदान को बढ़ावा देने स्वास्थ्यकर्मियों को मिला प्रशिक्षण

कुछ माह पहले स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने प्रदेश में नेत्रदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े 25 अगस्त से 8 सितंबर के पहले स्वास्थ्यकर्मियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई।

इसका उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को संभावित नेत्रदाताओं की पहचान, उनके परिजनों की काउंसलिंग और नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए तैयार करना रहा।

काउंसलिंग से लेकर कॉर्निया संरक्षण तक प्रशिक्षण

प्रशिक्षण में शोकग्रस्त परिवारों से संवेदनशील संवाद, परिवार की आशंकाओं एवं भ्रांतियों का समाधान, डोनर चयन, मेडिकल स्क्रीनिंग, कॉर्निया प्राप्त करने की तकनीक, ऊतक संरक्षण, कोल्ड चेन और सुरक्षित परिवहन सहित विभिन्न विषयों पर जानकारी दी गई।

कन्सेंट फॉर्म, डेथ सर्टिफिकेट और आई बैंक रिकॉर्ड सहित आवश्यक दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया भी समझाई गई। वास्तविक मामलों पर चर्चा, इंटरैक्टिव क्विज और रोल-प्ले के माध्यम से प्रतिभागियों को परिवारों से कठिन परिस्थितियों में संवाद करने का अभ्यास कराया गया।

हैंड्स-ऑन और डेमोंस्ट्रेशन आधारित प्रशिक्षण

कार्यशाला की खासियत सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण रहा। एन्यूक्लिएशन की वीडियो डेमोंस्ट्रेशन, इन-सिटू कॉर्नियोस्क्लेरल रिम प्राप्त करने और संरक्षण, कॉर्नियल टिश्यू के परिवहन, काउंसलिंग, डॉक्यूमेंटेशन तथा मॉइस्ट चैंबर तैयार करने की प्रक्रिया प्रदर्शित की गई।

इससे प्रतिभागियों को नेत्रदान से जुड़ी वास्तविक प्रक्रियाओं की व्यावहारिक समझ हासिल करने का अवसर मिला।

महाविद्यालय और अस्पताल प्रशासन का सहयोग

कार्यशाला के आयोजन में चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी का मार्गदर्शन और सहयोग रहा। डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने व्यवस्थागत सहयोग एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

आयोजकों ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि नेत्रदान से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों के ज्ञान, कौशल और संवेदनशीलता को मजबूत करना है।

नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया में स्वास्थ्यकर्मियों की अहम भूमिका

संभावित दाता की पहचान से लेकर परिवार से संपर्क, काउंसलिंग, नेत्र प्राप्ति, संरक्षण और दस्तावेजीकरण तक नेत्र सहायक अधिकारियों एवं सहायक नेत्रदान अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े से ठीक पहले आयोजित यह प्रशिक्षण प्रदेश में नेत्रदान गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों का पोस्ट-टेस्ट और फीडबैक लिया गया तथा उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया।

दृष्टि का उपहार, आशा की विरासत

कार्यशाला का संदेश रहा कि एक नेत्रदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में दृष्टि और आशा का नया उजाला ला सकता है। इसके लिए जन-जागरूकता के साथ प्रशिक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम और संवेदनशील स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

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