रायपुर : सेवा संकल्प अभियान : औषधीय खस की खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

PTV BHARAT 29 SEPTEMBER 2026 – रायपुर : सेवा संकल्प अभियान : औषधीय खस की खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम – धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड की ग्राम पंचायत परखंदा में ‘धान के कटोरा उत्पादक समिति’ स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर औषधीय एवं सुगंधित फसल खस की खेती शुरू की। समूह ने 2.50 एकड़ में खस की खेती कर पहली ही फसल में 11.20 क्विंटल उत्पादन किया और 1 लाख 12 हजार रुपये की आय अर्जित की। यह पहल कृषि विविधीकरण, महिला सशक्तिकरण और सामूहिक आजीविका का उदाहरण बन रही है।

खस से आय के नए अवसर – खस एक औषधीय और सुगंधित पौधा है। इसकी जड़ों से प्राप्त सुगंधित तेल का उपयोग शरबत, पान मसाला, तंबाकू, इत्र, साबुन और सौंदर्य उत्पादों में किया जाता है। इसकी सूखी जड़ों का उपयोग कपड़ों में सुगंध के लिए और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में भी किया जाता है।

पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अपनाया नया रास्ता – खस की खेती समूह की महिलाओं के लिए नया अनुभव था। उत्पादन और देखभाल की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने सामूहिक श्रम, नियमित देखभाल और सीखने की इच्छा के साथ खेती को आगे बढ़ाया। पहली फसल से 11.20 क्विंटल उत्पादन और 1.12 लाख रुपये की आय ने महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाया और कृषि आधारित आजीविका को नई दिशा दी।

औषधीय और मूल्यवर्धित फसलों से बढ़े विकल्प – स्व-सहायता समूह की महिलाएं अब बचत और ऋण तक सीमित न रहकर उत्पादन, फसल प्रबंधन और विपणन जैसी गतिविधियों में भी भागीदारी कर रही हैं। खस की खेती से मिले अनुभव ने उन्हें मांग आधारित, औषधीय और मूल्यवर्धित फसलों के माध्यम से आय के नए अवसर तलाशने का रास्ता दिखाया है।

6 एकड़ में मिश्रित वृक्षारोपण – ग्राम पंचायत परखंदा में योजनांतर्गत 6 एकड़ क्षेत्र में मिश्रित वृक्षारोपण भी किया गया है। इसका उद्देश्य हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता का संरक्षण करना है। औषधीय खेती और वृक्षारोपण से यहां ‘पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका संवर्धन’ का मॉडल विकसित हो रहा है।

खस के बाद हल्दी की खेती भी शुरू – पहली फसल के उत्साहजनक परिणाम के बाद समूह की महिलाओं ने खस के साथ हल्दी की खेती भी शुरू की है। फसल विविधीकरण से एक ही फसल पर निर्भरता कम करने और उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग करने के अवसर बढ़े हैं।

खेत से आत्मनिर्भरता तक का सफर – परखंदा की महिलाओं की कहानी केवल 11.20 क्विंटल खस उत्पादन और 1.12 लाख रुपये की आय तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण महिलाओं के लाभार्थी से आजीविका गतिविधियों की संचालक बनने की कहानी है। सामूहिक प्रयास, नई सोच, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के समन्वय से यह पहल ग्रामीण आजीविका और आत्मनिर्भरता का प्रेरक उदाहरण बन रही है।

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