रायपुर : वनांचल की गृहिणी कुसुम सिन्हा बनीं ‘लखपति दीदी’, राखी कारोबार से 7 लाख रुपए की आय की उम्मीद

PTV BHARAT 23 AUGUST 2026 – बालोद : वनांचल की गृहिणी कुसुम सिन्हा बनीं ‘लखपति दीदी’, राखी कारोबार से 7 लाख रुपए की आय की उम्मीद – बालोद जिले के डौंडी विकासखंड के वनांचल ग्राम कुमुड़कट्टा की श्रीमती कुसुम सिन्हा ने बिहान योजना से जुड़कर पारंपरिक हुनर को आजीविका का माध्यम बनाया है। कभी गृहिणी रहीं कुसुम आज सफल ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

12 महिलाओं का समूह, कई तरह के उत्पाद

कुसुम सिन्हा जय मां पहाड़ों वाली स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। समूह में 12 महिलाएं सक्रिय हैं। महिलाएं अचार, रंगोली और मौसम के अनुसार विभिन्न उत्पाद तैयार कर आय अर्जित करती हैं।

रक्षाबंधन को देखते हुए समूह ने कई महीने पहले से ही पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल राखियां तैयार करना शुरू कर दिया था।

धान, चावल, गेहूं और बांस से तैयार राखियां

समूह द्वारा धान, चावल, गेहूं, मूंग, बांस और ऊन जैसी सामग्रियों से आकर्षक एवं इको-फ्रेंडली राखियां तैयार की जा रही हैं। इन राखियों की बालोद सहित आसपास के कई जिलों में मांग बनी हुई है।

समूह अब तक 12 हजार से अधिक राखियां तैयार कर बेच चुका है। इस सीजन में राखी कारोबार से करीब 7 लाख रुपये तक की आय होने की उम्मीद है।

‘लखपति दीदी’ के रूप में सम्मानित

आजीविका संवर्धन में उत्कृष्ट कार्य के लिए कुसुम सिन्हा को जिला और राज्य स्तर पर ‘लखपति दीदी’ के रूप में सम्मानित किया जा चुका है।

उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि घर की सीमाओं से बाहर निकलकर स्वरोजगार अपनाने से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज में उनकी नई पहचान बनती है।

‘बिहान’ से मजबूत हुआ आत्मनिर्भरता का आधार

कुसुम सिन्हा ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को बड़े भाई के रूप में संबोधित करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया और रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना और बिहान जैसी पहलें महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद कर रही हैं। कुसुम और उनके समूह की कहानी बताती है कि स्थानीय संसाधनों, सामूहिक मेहनत और बाजार से जुड़ाव के जरिए ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं।

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