PTV BHARAT 28 AUGUST 2026 – मोहला : फॉस्टर केयर से बालक को मिला नया परिवार, सुरक्षित भविष्य की नई शुरुआत – मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल कल्याण समिति के संयुक्त प्रयासों से पहला सफल फॉस्टर केयर पुनर्वास पूरा हुआ है। इसके तहत संस्थागत देखरेख में रह रहे एक बालक को सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया गया।
ढाबे से रेस्क्यू के बाद मिला संरक्षण
1 जून से 30 जून 2026 तक कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के रेस्क्यू और पुनर्वास के लिए विशेष अभियान चलाया गया था। इसी दौरान श्रम, पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम ने एक स्थानीय ढाबे से बालक का रेस्क्यू किया।
जांच में पता चला कि बालक के माता-पिता और दादा-दादी का निधन हो चुका था। इसके बाद उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर तत्काल संरक्षण के लिए बालगृह भेजा गया।
बालक की इच्छा के अनुसार खोजा गया पारिवारिक विकल्प
बालगृह में काउंसलिंग के दौरान बालक ने संस्थागत जीवन की जगह पारिवारिक वातावरण में रहने की इच्छा जताई। उसकी भावनात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फॉस्टर केयर के माध्यम से परिवार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।
जिला बाल संरक्षण इकाई के सामाजिक कार्यकर्ता और संरक्षण अधिकारी ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन अल्टरनेटिव केयर, दुर्ग संभाग के समन्वय से बालक के दूर के रिश्तेदारों से संपर्क किया। काउंसलिंग के बाद रिश्तेदारों ने उसे अपने परिवार में रखने और उसके भविष्य की जिम्मेदारी लेने पर सहमति दी।
पात्रता सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया के बाद मिला परिवार
संभावित पोषण परिवार का गृह अध्ययन, साक्षात्कार और पात्रता सत्यापन किया गया। बालक का आधार कार्ड बनवाने सहित जरूरी दस्तावेजी और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं।
किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के तहत बाल कल्याण समिति की अनुशंसा और जिला प्रशासन की मंजूरी के बाद बालक को विधिवत पोषण परिवार के सुपुर्द किया गया। पूरी प्रक्रिया में बालक के सर्वोत्तम हित और सुरक्षित भविष्य को प्राथमिकता दी गई।
अब परिवार के साथ सुरक्षित और स्कूल जा रहा बालक
फॉस्टर केयर के जरिए अब बालक को संस्थागत जीवन के स्थान पर परिवार का स्नेह, सुरक्षा और अपनापन मिल रहा है। वह नए परिवार के साथ सुरक्षित जीवन बिता रहा है और नियमित रूप से स्कूल जाकर पढ़ाई जारी रखे हुए है।
पोषण परिवार उसकी दैनिक आवश्यकताओं के साथ उसकी शिक्षा का भी ध्यान रख रहा है। यह पहल दिखाती है कि सही वैकल्पिक देखरेख व्यवस्था और संवेदनशील प्रशासनिक प्रयासों के जरिए जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित परिवार और बेहतर भविष्य दिया जा सकता है।

