PTV BHARAT 28 AUGUST 2026 – गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : धनपुर की पुरातात्विक धरोहरों को मिलेगा संरक्षण और संवर्धन का नया आधार – गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। संस्कृति मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर से चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने जिले के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों का विस्तृत मैदानी सर्वेक्षण किया।
धनपुर सहित चार प्रमुख स्थलों का निरीक्षण
विशेषज्ञ दल ने धनपुर, बेनीबाई, भस्मासुर टापू और शहरखेरवा के पुरातात्विक स्थलों का निरीक्षण किया। टीम ने इन स्थानों की वर्तमान स्थिति, ऐतिहासिक महत्व, संरक्षण की जरूरत और भविष्य में विकास की संभावनाओं का अध्ययन किया।
चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने किया सर्वे
रायपुर से पहुंचे दल में पुरातत्ववेत्ता प्रभात कुमार सिंह, उत्खनन सहायक प्रवीण तिर्की, शोधकर्ता डॉ. राजीव जॉन मिंज और शोधकर्ता अमर भारद्वाज शामिल रहे।
दल ने मौके पर उपलब्ध प्राचीन मूर्तियों, पुरावशेषों और स्मारकों की स्थिति का प्रत्यक्ष अध्ययन किया।
धनपुर की प्राचीन मूर्तियों और मंदिर का सूक्ष्म निरीक्षण
विशेषज्ञों ने धनपुर स्थित प्राचीन मंदिर और वहां स्थापित ऐतिहासिक मूर्तियों का बारीकी से निरीक्षण किया। मंदिर की संरचना, परिसर में मौजूद पुरातात्विक अवशेषों और संरक्षण की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया गया।
इसके अलावा धनपुर-धोबहर धरोहर केंद्र में रखी प्राचीन मूर्तियों और अन्य पुरावशेषों का भी अध्ययन किया गया। विशेषज्ञों ने इनके संरक्षण, रखरखाव और प्रभावी प्रबंधन की संभावनाओं पर चर्चा की।
बेनीबाई और भस्मासुर टापू का भी अध्ययन
सर्वेक्षण दल ने बेनीबाई और भस्मासुर टापू में मौजूद प्राचीन मूर्तियों एवं अन्य धरोहरों की स्थिति का निरीक्षण किया। संरक्षण और आवश्यक रखरखाव से जुड़े संभावित उपायों का भी आकलन किया गया।
शहरखेरवा में खोजी गई पुरातात्विक संभावनाएं
ऐतिहासिक महत्व वाले शहरखेरवा क्षेत्र का भी विस्तृत सर्वे किया गया। यहां उपलब्ध पुरातात्विक अवशेषों और संभावित धरोहर स्थलों का निरीक्षण कर आगे के अध्ययन और संरक्षण की संभावनाओं का मूल्यांकन किया गया।
कलेक्टर ने विशेषज्ञों के साथ की बैठक
सर्वेक्षण के बाद कलेक्टर विजय दयाराम के. ने विशेषज्ञ दल के साथ बैठक कर फील्ड स्टडी के निष्कर्षों की जानकारी ली। विभिन्न स्थलों की स्थिति, संरक्षण की आवश्यकता और किए जाने वाले कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कलेक्टर ने प्राचीन मूर्तियों और स्मारकों के संरक्षण तथा सुदृढ़ीकरण से जुड़े आवश्यक कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धनपुर क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरें जिले की महत्वपूर्ण पहचान हैं और इन्हें योजनाबद्ध तरीके से संरक्षित कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
विरासत संरक्षण के साथ पर्यटन की भी संभावना
धनपुर और अन्य पुरातात्विक स्थलों का सर्वेक्षण केवल संरक्षण तक सीमित नहीं है। व्यवस्थित संरक्षण, बेहतर रखरखाव और आवश्यक सुविधाओं के विकास के बाद इन स्थलों को सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।
जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत धनपुर की टीम ने पूरे सर्वेक्षण के दौरान विशेषज्ञ दल को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया।

