धमतरी : सतावर की खेती से कम लागत में अधिक मुनाफा

PTV BHARAT 28 AUGUST 2026 – धमतरी : सतावर की खेती से कम लागत में अधिक मुनाफा – छत्तीसगढ़ में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ औषधीय पौधों की खेती से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा सतावर सहित औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

65 किसान 140 एकड़ में कर रहे सतावर की खेती

सतावर की जड़ों की आयुर्वेदिक और हर्बल औषधियों में मांग को देखते हुए धमतरी, कांकेर और कोंडागांव के 65 किसान करीब 140 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं।

बोर्ड का उद्देश्य किसानों को औषधीय पौधों की खेती से जोड़कर उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना है।

कम पानी और कम लागत में खेती

सतावर की खेती में अधिक पानी और महंगे कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती। फसल में कीट और रोगों का प्रकोप भी कम बताया गया है।

शुरुआती सिंचाई के बाद सामान्यतः महीने में एक बार हल्की सिंचाई पर्याप्त मानी गई है। एक एकड़ में इसकी खेती की लागत लगभग 20 हजार रुपये तक आती है और फसल 18 से 20 महीने में तैयार हो जाती है।

एक एकड़ से 20 से 25 क्विंटल सूखी जड़

दिए गए आंकड़ों के अनुसार एक एकड़ से करीब 200 से 250 क्विंटल ताजी जड़ें प्राप्त हो सकती हैं। सुखाने के बाद यही मात्रा लगभग 20 से 25 क्विंटल रह जाती है।

सूखी सतावर की जड़ों का बाजार भाव करीब 180 से 220 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है।

शासन की मदद से आसान होगी खेती

सतावर की खेती के इच्छुक किसान औषधि पादप बोर्ड से संपर्क कर सकते हैं। जरूरत के अनुसार बोर्ड द्वारा सतावर के पौधे नि:शुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।

किसानों को पौधरोपण से लेकर फसल तैयार होने तक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। वहीं उपज की बिक्री के लिए अनुबंधित खरीदारों के माध्यम से खरीद सुनिश्चित करने की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है।

औषधीय खेती से अतिरिक्त आय का अवसर

सतावर की खेती कम लागत, सीमित सिंचाई और अपेक्षाकृत कम संसाधनों में अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकती है। पारंपरिक फसलों के साथ औषधीय पौधों की खेती किसानों को आय के नए बाजार से जोड़ने का अवसर देती है।

छत्तीसगढ़ में सतावर की खेती को बढ़ावा देने की यह पहल किसानों के लिए औषधीय कृषि, कम लागत और बेहतर आमदनी की दिशा में एक उपयोगी विकल्प के रूप में सामने आ रही है।

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