रायपुर : धान में लीफ फोल्डर और पीला तना छेदक की निगरानी बढ़ाएं किसान : ICAR-NIBSM

PTV BHARAT 28 AUGUST 2026 – रायपुर : धान में लीफ फोल्डर और पीला तना छेदक की निगरानी बढ़ाएं किसान : ICAR-NIBSM – छत्तीसगढ़ में धान की फसल अब करीब 45 दिन या उससे अधिक की हो चुकी है। आने वाले दिनों में मौसम की परिस्थितियां कुछ प्रमुख कीटों के लिए अनुकूल हो सकती हैं। इसे देखते हुए आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (एनआईबीएसएम) ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और जरूरत के अनुसार समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है।

लीफ फोल्डर पर रखें विशेष नजर

संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने बताया कि लीफ फोल्डर यानी पत्ती मोड़क धान का प्रमुख कीट है। इसकी सूंडियां पत्तियों को लंबाई में मोड़कर उनके अंदर रहकर हरे ऊतकों को खाती हैं।

इसके प्रकोप से पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई दे सकती हैं और प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है। अधिक प्रकोप होने पर फसल की वृद्धि और उपज पर भी असर पड़ सकता है।

किसानों को खेत में मुड़ी हुई पत्तियों, सूंडियों और क्षति के लक्षणों की नियमित जांच करने तथा आर्थिक क्षति स्तर से अधिक प्रकोप होने पर ही नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

पीला तना छेदक भी बन सकता है समस्या

फसल की आगे की अवस्था में पीला तना छेदक महत्वपूर्ण कीट बन सकता है। इसके भूरे रंग के अंड समूह अक्सर पत्ती के सिरे के पास दिखाई देते हैं। अंडों से निकलने वाली सूंडियां तने में प्रवेश कर अंदर के ऊतकों को नुकसान पहुंचाती हैं।

वानस्पतिक अवस्था में इससे ‘डेड हार्ट’ और बाद की अवस्था में ‘व्हाइट ईयर’ यानी सफेद बालियां दिखाई दे सकती हैं। इसलिए शुरुआती पहचान और नियंत्रण को महत्वपूर्ण बताया गया है।

फेरोमोन ट्रैप और ट्राइको-कार्ड का उपयोग

किसानों को खेतों की नियमित निगरानी के साथ दिखाई देने वाले अंड समूहों को इकट्ठा कर नष्ट करने की सलाह दी गई है। वयस्क कीटों की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाने तथा जरूरत के अनुसार ट्राइको-कार्ड का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।

प्रभावित और ज्यादा क्षतिग्रस्त पौधों या कोंपलों को खेत से निकालकर नष्ट करने से भी कीट प्रकोप कम करने में मदद मिल सकती है।

अंधाधुंध कीटनाशक प्रयोग से बचें

आईसीएआर-एनआईबीएसएम के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने किसानों से फसल की नियमित निगरानी और कीटों की शुरुआती पहचान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनावश्यक और अंधाधुंध कीटनाशियों के प्रयोग से बचना चाहिए।

आर्थिक क्षति स्तर तक कीटों की संख्या पहुंचने पर ही आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाने से उत्पादन लागत कम करने के साथ मित्र कीटों और पर्यावरण का संरक्षण किया जा सकता है।

समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह

संस्थान ने धान में कीट नियंत्रण के लिए नियमित निगरानी, यांत्रिक उपाय, जैविक नियंत्रण, प्राकृतिक शत्रु कीटों का संरक्षण और आवश्यकता आधारित कीटनाशी प्रयोग को प्रभावी एवं टिकाऊ तरीका बताया है।

किसानों को आगामी सप्ताहों में अपनी फसल पर विशेष नजर रखने और कीटों का असामान्य प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेने की सलाह दी गई है।

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