PTV BHARAT 31 AUGUST 2026 – रायपुर : ICAR-NIBSM ने SCSP के तहत किसानों को बांटे पावर स्प्रेयर और सोलर पैनल – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर ने अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) के अंतर्गत किसानों और महिला किसानों को 140 बैटरी चालित पावर स्प्रेयर तथा सोलर पैनल के 3 सेट वितरित किए। इसका उद्देश्य कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देना, किसानों की शारीरिक मेहनत कम करना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम में मुर्रा, बेठिया, देवगांव, अडसेना और बेलटुकरी गांवों के 160 किसान एवं महिला किसान शामिल हुए।
वर्षाजल संरक्षण और फसल विविधीकरण पर जोर
ICAR-NIBSM के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने किसानों को वर्तमान मानसून के दौरान वर्षाजल के संग्रहण और संरक्षण की आवश्यकता बताई। उन्होंने किसानों से उपलब्ध जल-संचयन संरचनाओं में वर्षाजल एकत्र कर उसका उपयोग रबी फसलों के उत्पादन में विवेकपूर्ण तरीके से करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि जोखिम कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
SCSP के माध्यम से तकनीकी सहयोग
डॉ. राय ने बताया कि संस्थान SCSP कार्यक्रम के तहत विभिन्न गांवों के किसानों और महिला किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार तकनीकी ज्ञान, प्रशिक्षण, कृषि सामग्री और उपकरण उपलब्ध करा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसी पहल किसानों की क्षमता बढ़ाने और कृषि उत्पादकता में सुधार लाने में सहायक हैं।
धान में कीट और रोगों की निगरानी की सलाह
संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पंकज शर्मा ने किसानों को धान की फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में धान रोपाई के करीब 40 से 50 दिन की अवस्था में है।
इस दौरान तना छेदक (येलो स्टेम बोरर) और पत्ती लपेटक (लीफ फोल्डर) का प्रकोप देखा जा रहा है। कुछ स्थानों पर जीवाणु झुलसा रोग (बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट) के लक्षण भी पाए गए हैं।
उन्होंने किसानों से कीट और रोगों की शुरुआती पहचान कर आवश्यकता के अनुसार समय पर नियंत्रण उपाय अपनाने तथा अनावश्यक कीटनाशकों से बचने की सलाह दी।
फेरोमोन ट्रैप और ट्राइकोकार्ड अपनाने की सलाह
डॉ. शर्मा ने फेरोमोन ट्रैप और ट्राइकोकार्ड को एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) के महत्वपूर्ण घटक बताते हुए इनके उपयोग पर जोर दिया। रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग केवल आवश्यकता और कीट प्रकोप के स्तर के आधार पर करने की सलाह दी गई।
किसानों ने जताया संस्थान के प्रति आभार
कार्यक्रम में शामिल किसानों और ग्राम प्रतिनिधियों ने SCSP के तहत तकनीकी मार्गदर्शन, कृषि उपकरण और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए संस्थान का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने पावर स्प्रेयर और सोलर पैनल के वितरण को कृषि कार्यों को आसान बनाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में उपयोगी पहल बताया।
कार्यक्रम में सरपंच कंचन गायकवाड़, प्रदीप मडरिया सहित संस्थान के वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय प्रधान वैज्ञानिक एवं नोडल अधिकारी डॉ. के.सी. शर्मा ने किया।

