मनेंद्रगढ़ : तालाब बना आत्मनिर्भरता का आधार, वैज्ञानिक मत्स्य पालन से कामिनी की आय में हुआ इजाफा

PTV BHARAT 31 AUGUST 2026 – मनेंद्रगढ़ : तालाब बना आत्मनिर्भरता का आधार, वैज्ञानिक मत्स्य पालन से कामिनी की आय में हुआ इजाफा – मेहनत, सही तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन के सहारे खोंगापानी, विकासखंड मनेंद्रगढ़ की मत्स्य कृषक कामिनी रोहतिया ने अपने करीब 1 हेक्टेयर तालाब को आय का मजबूत साधन बनाया है। वर्ष 2022 में मत्स्य विभाग के सहयोग से वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन शुरू करने के बाद अब उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हो रहा है।

मत्स्य पालन से बदली आय की तस्वीर

मत्स्य पालन शुरू करने से पहले कामिनी मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर थीं। वर्ष 2022 में मत्स्य विभाग की नवीन तालाब निर्माण योजना के अंतर्गत उन्हें लगभग 1 हेक्टेयर तालाब निर्माण का लाभ मिला। इसके बाद उन्होंने तालाब का बेहतर उपयोग करते हुए मत्स्य पालन शुरू किया।

विभाग ने उन्हें तालाब प्रबंधन, वैज्ञानिक मत्स्य पालन तकनीक और मछलियों की देखभाल का प्रशिक्षण दिया। इसके आधार पर उन्होंने तालाब में भारतीय प्रमुख कार्प (IMC) प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया और करीब 5 हजार फिंगरलिंग्स का स्टॉकिंग किया।

वैज्ञानिक प्रबंधन से बढ़ा उत्पादन और लाभ

कामिनी तालाब में मछलियों के उचित प्रबंधन और पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान देती हैं। समय-समय पर आवश्यक देखभाल के साथ मछलियों में संभावित बीमारियों की पहचान और रोकथाम से जुड़ी तकनीकों का भी उपयोग करती हैं।

वैज्ञानिक पद्धति और नियमित देखभाल का परिणाम उनकी आय में दिखाई दिया। करीब 1 हेक्टेयर तालाब से उन्हें वर्तमान में मत्स्य पालन के जरिए लगभग 2 लाख रुपये का वार्षिक लाभ मिल रहा है।

विभागीय मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी

कामिनी के अनुसार मत्स्य विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें मत्स्य बीज संचयन, तालाब प्रबंधन, मछलियों की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने में काफी मदद की।

वर्ष 2022 से लगातार मत्स्य पालन करने के कारण उन्होंने तालाब प्रबंधन और मछलियों की देखभाल का व्यावहारिक अनुभव भी हासिल किया है। अब उनका लक्ष्य उत्पादन और आय को और बढ़ाना है।

अन्य किसानों के लिए प्रेरक संदेश

कामिनी का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, वैज्ञानिक तकनीक और विशेषज्ञों की सलाह अपनाकर मत्स्य पालन को लाभदायक आजीविका बनाया जा सकता है।

उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी योजना, तकनीकी मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत के साथ एक साधारण तालाब भी ग्रामीण परिवार के लिए आत्मनिर्भरता और समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है।

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